पंतनगर। 8 अगस्त 2026। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के परिधान एवं वस्त्र विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर भारतीय हथकरघा की समृद्ध परंपरा एवं उसके संरक्षण के उद्देश्य से एक भव्य एवं मनोरंजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की अधिष्ठाता डा. अलका गोयल व परिधान एवं वस्त्र विज्ञान विभागाध्यक्ष डा. मनीषा गहलोत ने की। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल आयोजन विभाग के स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. विद्यार्थियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पार्वती को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। पार्वती लंबे समय से हस्तकला एवं हथकरघा आधारित गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं तथा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पारंपरिक हस्तकला एवं हथकरघा तकनीकों का उपयोग कर विभिन्न उपयोगी एवं आकर्षक उत्पादों का निर्माण करती हैं।
अपने संबोधन में डा. अलका गोयल ने भारतीय हथकरघा उद्योग को आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों से देश की पारंपरिक वस्त्र कला को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। वहीं डा. मनीषा गहलोत ने कहा कि हथकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान, कारीगरों की आजीविका तथा पारंपरिक ज्ञान का जीवंत प्रतीक है।
कार्यक्रम को रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनाने के लिए अनेक मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
प्रतिभागियों ने पासिंग द पार्सल, क्विज़, जीआई टैग आधारित प्रश्नोत्तरी तथा अन्य ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजक प्रतियोगितियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भारतीय हथकरघा, पारंपरिक वस्त्रों तथा उनकी विशिष्टताओं से जुड़ी जानकारी को खेल-खेल में सीखा। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर किया गया। संपूर्ण आयोजन उत्साह, सहभागिता एवं भारतीय हथकरघा के प्रति सम्मान की भावना से परिपूर्ण रहा तथा उपस्थित सभी लोगों ने हस्तनिर्मित वस्त्रों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया।





