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पंतनगर विश्वविद्यालय की छह उन्नत किस्में बढ़ाएंगी प्रदेश में उत्पादन और किसानों की आय

by Rajendra Joshi
September 12, 2026
in देहरादून
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पंतनगर। 12 सितम्बर 2026। देहरादून में सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण, उत्तराखण्ड डा. सुरेन्द्र नारायण पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित उत्तराखंड राज्य बीज उप-समिति की 16वीं बैठक में गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित 6 फसलों प्रत्येक की एक प्रजाति उत्तराखंड के विभिन्न जलवायु दशाओं में खेती के लिए अनुमोदित की गईं, जिनमें क्रमशः धान की अगेती किस्म पंत धान 29, जौ की किस्म पंत जौ 1091 (यूपीबी-1091), पंत संकर मक्का 9 (डीएच 353), राई की किस्म पीआरबी 2015-2, ज्वार की किस्म पंत चरी 16 (यूटीएफएस 121) एवं जई की पंत चारा जई-5 (यूपीओ-16-4) हैं।


धान की किस्म पंत धान 29 अल्प अवधि में उच्च उत्पादकता वाली बौनी किस्म है जोकि 115 दिन में पक जाती है और इसका उत्पादन 50 कुन्तल प्रति हैक्टेयर है। अल्प अवधि में पकने के कारण यह रोग एवं कीटों के प्रकोप से बच जाती है। जौ कि किस्म पंत जौ 1091 पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अनुमोदित की गयी है। पिछले तीन वर्षों में किये गये परीक्षणों में पंत जौ 1091 प्रचलित किस्मों क्रमशः यूपीबी 1008, वीएलबी 130 एवं वीएलबी 118 पर 21.98 प्रतिशत, 8.36 प्रतिषत एवं 5.87 प्रतिशत की अधिक उपज दी है। पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी उपज क्षमता 38.16 कुन्तल रही है साथ ही यह रतुआ रोग एवं आवृत कंड रोग के प्रति अवरोधी है। मक्का की पंत संकर 9 एकल संकर किस्म है जोकि उत्तराखण्ड के मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुमोदित की गयी है और खरीफ मौसम में इसकी उपज क्षमता 84.85 कुन्तल प्रति हैक्टेयर तथा बसंत ऋतु में 92.13 कुन्तल प्रति हैक्टेयर रही है।

राज्य स्तरीय परीक्षणों में इसकी उपज 64.30 कुन्तल प्रति हैक्टेयर रही है। यह एक मध्यम ऊंचाई, मजबूत तना और कसे हुए भुट्टों तथा नारंगी-पीले रंग के सुडोल दानों वाले प्रजाति है। राई (भारतीय सरसों) की किस्म पीआरबी 2015-2 राज्य स्तरी परीक्षणों में प्रचलित किस्मों क्रमशः पीआर-20 एवं क्रांति के उपर 15.55 प्रतिशत और 12.95 प्रतिशत की उपज वृद्धि दी है। यह मध्यम अवधि (134 दिन) में पकने वाली तथा इसमें तेल की मात्रा 40.8 प्रतिशत है। यह रोग एवं कीटों के प्रति अवरोधी है। ज्वार की चारा वाली फसल पंत चरी 16 यह एक कटान वाली चारा ज्वार (चरी) की प्रजाति है जिसकी औसत उपज 828.35 कुन्तल प्रति हैक्टेयर हरा चारा एवं 124.33 कुन्तल प्रति हैक्टेयर सूखा चारा प्राप्त किया जा सकता है। 50 प्रतिशत फूल आने की अवस्था पर कटाई करने पर उच्च गुणवत्तायुक्त चारा प्राप्त होता है। यह प्रजाति पत्तियों में लगने वाले रोगों के लिए प्रतिरोधी है। जई की प्रजाति पंत चारा जई 5 के हरे चारे की औसत उपज 599.48 कुन्तल प्रति हैक्टेयर और सूखे चारे की उपज 131.76 कुन्तल प्रति हैक्टेयर रही है। इस प्रजाति का चारा उच्च गुणवत्ता वाला है क्योंकि इसमें न्यूट्रल डिटर्जेन्ट फाइबर तथा एसिड डिटर्जेन्ट फाइबर दोनों की कम मात्रा है। यह प्रजाति भी रोगों के लिए प्रतिरोधी है।


इन किस्मों को विकसित करने वाले वैज्ञानिक क्रमशः धान प्रजनक डा. इंद्र देव एवं डा. डी. सी. बसखेती; गेहूं एवं जौ प्रजनक डा. जे. पी. जायसवाल, डा. स्वाति प्रशांत एवं डा. अनिल कुमार; मक्का प्रजनक डा. एन. के. सिंह; तिलहन प्रजनक डा. ऊषा पंत, डा. राम भजन एवं डा. ए.के. सिंह; ज्वार प्रजनक डा. पी के पाण्डेय, डा. पी.के. श्रोत्रिया एवं डा. शिव जी सिंह तथा जई प्रजनक डा. बीरेंद्र प्रसाद है।


इन प्रजातियों के विकास के लिए अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के विभागाध्यक्ष, डा. जे.पी. जायसवाल; अधिष्ठाता, कृषि डा. अनिल शुक्ला; निदेशक, शोध डा. एस.के. वर्मा ने सभी वैज्ञानिकों को बधाई दी है। विश्वविद्यालय के कुलपति डा. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने एक साथ 6 फसलों की 6 प्रजातियों के उत्तराखंड राज्य में खेती के लिए अनुमोदन पर हर्ष व्यक्त करते हुए सभी वैज्ञानिकों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न फसलों की किस्मों के साथ चारे की दो फसलों की प्रजातियों का अनुमोदन जहां विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ी उपलब्धि है वहीं प्रदेश में ये प्रजातियां खाद्यान्न एवं चारा के उत्पादन में वृद्धि करने और किसानो की आमदनी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

Tags: GB Pant University

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