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बौद्धिक संपदा अधिकार के संरक्षण से नवाचार को मिलेगा बढ़ावा : कुलपति

by Rajendra Joshi
March 30, 2026
in उधम सिंह नगर
0
GB Pant University, Pantnagar
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पंतनगर। 30 मार्च 2026। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के आईपीआर सेल और बौद्धिक संपदा प्रबंधन केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों’ (आईपीआर) पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन वर्चुअल माध्यम में 29 और 30 मार्च, 2026 को किया गया। इस कार्यशाला में देश भर के लगभग 50 शैक्षणिक संस्थानों से 300 से अधिक संकाय सदस्यों और छात्रों ने भाग लिया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान ने उद्घाटन सत्र के दौरान प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों, नवाचार में उनके महत्व, बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा और आईपीआर के विकासकर्ता को होने वाले वित्तीय लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने संकाय सदस्यों और छात्रों को जागरूक करने और शिक्षित करने के लिए ऐसी कार्यशालाओं के आयोजन के महत्व पर भी प्रकाश डाला, क्योंकि यह न केवल व्यक्तियों के लिए, बल्कि संस्थानों और देश के लिए भी लाभकारी सिद्ध होता है।

डा. जे.पी. जायसवाल, विभागाध्यक्ष, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन एवं नोडल अधिकारी, आईपीआर सेल ने मुख्य अतिथि और प्रतिभागियों का स्वागत किया, तथा आईपीआर के साथ-साथ पेटेंट फाइल करने, डिज़ाइन पंजीकरण, ट्रेडमार्क, भौगोलिक संकेतक (जिओग्राफिकल इंडिकेशन), कॉपीराइट आदि से संबंधित वर्तमान रुझानों का एक संक्षिप्त अवलोकन प्रस्तुत किया।

विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों यथा डा. प्रॉलय कुमार भौमिक, वरिष्ठ वैज्ञानिक, आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने बौद्धिक संपदा अधिकारों पर अपने विचार साझा किए, जिसमें उन्होंने ‘बासमती चावल’ के भौगोलिक संकेतक पंजीकरण के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

हिमांशु गोयल, वैज्ञानिक, उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और उत्तराखंड में आईपीआर मामलों के समन्वयक ने हिमालय के संदर्भ में पारंपरिक ज्ञान और पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों पर विस्तृत जानकारी दी।कार्यशाला के दूसरे दिन, विभिन्न संस्थानों के चार वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों का बौद्धिक सम्पदा अधिकार के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन किया। इनमें डा. एम.जी.एच. ज़ैदी, विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बौद्धिक संपदा प्रबंधन केंद्र शामिल थे, जिन्होंने ‘आईपीआर: एक अवलोकन तथा शैक्षणिक अनुसंधान एवं विकास में इसके निहितार्थ’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने सामान्य रूप से आईपीआर और विशेष रूप से पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया।

दूसरे वैज्ञानिक डा. सौरभ बडोनी, अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई), दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय केंद्र, वाराणसी ने ‘कृषि क्षेत्र में बौद्धिक संपदा अधिकार’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने ‘गैर-बासमती चावल’ के भौगोलिक संकेतक पंजीकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। डा. मुकेश करणवाल, प्राध्यापक, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग, पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय ने ‘पादप किस्मों का संरक्षण एवं कृषक अधिकार अधिनियम, 2001’ से संबंधित जानकारी विस्तारपूर्वक साझा की।

डा. सुजीत कुमार, प्राध्यापक, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने भौगोलिक संकेतकों के विषय में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने एक ही दिन में 4 दिसंबर 2023 को 18 जीआई टैग प्राप्त किये।

समापन सत्र में डा. जे.पी. जायसवाल ने सभी रिसोर्स पर्सन, फंडिंग एजेंसी यूकोस्ट, देहरादून और शोधार्थियों के योगदान की सराहना करते हुए देश के विभिन्न कोने से एक संक्षिप्त सूचना पर वृहद स्तर पर आईपीआर पर जागरूकता हेतु प्रतिभाग कर रहे संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों का भी धन्यवाद ज्ञापन किया। डा. एम.जी.एच. ज़ैदी ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकारों पर आयोजित यह दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला बहुत सफल रही, और इस तरह की जागरूकता कार्यशालाएँ आईपीआर के बारे में जानकारी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगी। डा. जायसवाल ने कार्यशाला के आयोजन में किए गए प्रयासों के लिए मिताली तिवारी, अभिषेक सिंह, प्रियंका परिहार और क्षितिज जायसवाल का आभार व्यक्त किया।

Tags: GB Pant University

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