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वाइल्डलाइफ बोर्ड से मंजूरी मिलते ही रेलवे ट्रैक बनेगा सुरक्षित, ट्रायल में पास हुआ AI सिस्टम

by Rajendra Joshi
July 14, 2026
in Dehardun, उत्तराखंड, ट्रेंडिंग खबरें, ताज़ा ख़बर, न्यूज़, भारत, सोशल मीडिया वायरल
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राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर होने वाली दुर्घटनाएं AI से कंट्रोल होंगी. जिसके लिए रेलवे ट्रैक पर इंट्रूशन डिडेक्शन सिस्टम लगाया जाएगा.-

देहरादून:उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक पर हाथियों और अन्य वन्यजीवों की मौत रोकने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का सहारा लिया जाएगा. राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने रेलवे ट्रैक पर इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (Intrusion Detection System) स्थापित करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंचा दी है. इसके लिए जल्द ही राज्य वन्यजीव बोर्ड (स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड) और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड) से अनुमति ली जाएगी. मंजूरी मिलते ही रेलवे ट्रैक पर इस आधुनिक तकनीक को स्थापित करने का काम शुरू कर दिया जाएगा.

राजाजी टाइगर रिजर्व उत्तराखंड के उन प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में शामिल है, जहां से रेलवे लाइन गुजरती है. कई बार हाथियों और अन्य वन्यजीवों के रेलवे ट्रैक पर आने से दुर्घटनाएं होती रही हैं, जिनमें वन्यजीवों की जान चली जाती है. इन घटनाओं को रोकना लंबे समय से वन विभाग और रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. अब इस चुनौती से निपटने के लिए तकनीक को समाधान के रूप में अपनाया जा रहा है.वन विभाग के अनुसार AI आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम का ट्रायल पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है.

मोतीचूर क्षेत्र में किए गए परीक्षण के दौरान पालतू हाथियों को रेलवे ट्रैक के आसपास लाकर सिस्टम की कार्यप्रणाली को परखा गया. ट्रायल का उद्देश्य यह जानना था कि हाथियों की मौजूदगी को सिस्टम कितनी तेजी और सटीकता से पहचान सकता है.परीक्षण के दौरान परिणाम पूरी तरह सकारात्मक रहे. जैसे ही हाथी रेलवे ट्रैक के करीब पहुंचे, सिस्टम ने तुरंत उनकी गतिविधि को पहचान लिया और वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तक अलर्ट पहुंचा दिया.

विभाग का दावा है कि परीक्षण के दौरान यह तकनीक शत-प्रतिशत सफल रही, जिससे अब इसे स्थायी रूप से लागू करने का रास्ता लगभग साफ हो गया है.इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रेलवे ट्रैक के आसपास होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखती है. इसके लिए ट्रैक के किनारे ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाई जाती है. यह केबल आसपास होने वाली हलचल को महसूस करती है और AI आधारित सिस्टम उसके विश्लेषण के बाद यह तय करता है कि ट्रैक के पास कोई बड़ा वन्यजीव मौजूद है या नहीं.

यदि हाथी या अन्य बड़े वन्यजीव की गतिविधि दर्ज होती है तो सिस्टम तुरंत वन विभाग की टीम को अलर्ट भेज देता है, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके. इस परियोजना को लेकर वन विभाग और भारतीय रेलवे के अधिकारी संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं. दोनों विभागों के बीच तकनीकी और संचालन स्तर पर समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि सिस्टम के संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए. अधिकारियों का मानना है कि इस तकनीक के लागू होने से रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की मौत की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी.-

इन्ट्यूशन डिडेक्शन सिस्टम को लगाने का प्रस्ताव है, जिसपर होमवर्क किया जा चुका है. मोतीचूर में हुए प्रयोग के दौरान भी यह सिस्टम सफल हो चुका है. ऐसे में अब वाइल्डलाइफ बोर्ड की मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा.
-कोको रोसे, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व-

गौरतलब है कि इस तकनीक का प्रयोग देश के अन्य राज्यों में भी सफल रहा है. असम और पश्चिम बंगाल में रेलवे ट्रैक पर AI आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम पहले से उपयोग में है और वहां हाथियों की सुरक्षा के लिहाज से इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. इन्हीं सफल अनुभवों को देखते हुए अब उत्तराखंड में भी राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक पर इसे लागू करने का निर्णय लिया गया है.राजाजी टाइगर रिजर्व हाथियों के महत्वपूर्ण आवास और आवाजाही वाले क्षेत्रों में शामिल है.

ऐसे में यहां AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने से न केवल हाथियों बल्कि अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा भी मजबूत होगी. वन विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक और विभागीय समन्वय के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के साथ-साथ रेलवे ट्रैक पर होने वाली दुर्घटनाओं पर भी प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा. अब सभी की नजरें स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड और नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड से मिलने वाली मंजूरी पर टिकी हैं. अनुमति मिलते ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

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