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राजकीय इन्टर मीडिएट कॉलेज, शान्तिपुरी में गाजर घास जागरूक सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन

by Rajendra Joshi
August 18, 2026
in उधम सिंह नगर
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पंतनगर। 18 अगस्त 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर (मध्य प्रदेश) के दिशा-निर्देशों के तहत हर साल की तरह इस बार भी पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के सस्य विज्ञान विभाग द्वारा अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधान शोध परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर से 21वां गाजर घास जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है।


इसी क्रम में गाजरघास जागरूकता सप्ताह के तीसरे दिन राजकीय इन्टर मीडिएट कॉलेज शान्तिपुरी नम्बर 02 में गाजर घास उन्मूलन एवं जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य डा. बी.सी. भट्ट ने की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सस्य विज्ञान विभाग के प्राध्यापक एवं परियोजनाधिकारी डा. एस.पी. सिंह उपस्थित रहे। छात्र-छात्राएं और शिक्षकों को संबोधित करते हुए डा. एस. पी. सिंह ने गाजर घास से होने वाले नुकसान, इसके आगमन और इसके पूर्ण उन्मूलन के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मूल रूप से उत्तरी और मध्य अमेरिका का पौधा है। भारत में यह 1950 के दशक में अमेरिका से भारत पहुंची थी। देखते ही देखते यह खतरनाक खरपतवार पूरे देश के सड़कों के किनारे, खाली जमीनों और खेतों में तेजी से फैल गई। डा. सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि गाजर घास न केवल फसलों की पैदावार में गिरावट लाती है, बल्कि इसके संपर्क में आने से इंसानों में त्वचा रोग (एक्जिमा), दमा (अस्थमा) और एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं। दुधारू पशुओं द्वारा इसे चरने से उनके दूध में कड़वाहट आ जाती है और उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है।

उन्होंने ने गाजर घास से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए एकीकृत खरपतवार प्रबंधन की रणनीति साझा की। गाजर घास में फूल आने से पहले ही इसे जड़ों से उखाड़ दें। उखाड़े गए पौधों को गड्ढे में दबाकर कंपोस्ट (जैविक खाद) या वर्मीकंपोस्ट में बदला जा सकता है। गाजर घास के प्राकृतिक उन्मूलन के लिए ‘जाइगोग्राम बिकलराटा‘ नामक मेक्सिकन बीटल (कीड़ा) का उपयोग किया जाता है, जो केवल गाजर घास की पत्तियों को खाकर इसे सुखा देता है। डा. सिंह ने गाजर घास को उखाड़ते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए जैसे इसे उखाड़ते समय हाथों में दस्ताने और चेहरे पर मास्क अवश्य पहनें ताकि एलर्जी से बचा जा सके।


कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य ने डा. एस. पी. सिंह का धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डा. सिंह द्वारा गाजर घास के इतिहास, स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभावों और इसके वैज्ञानिक उन्मूलन पर दी गई जानकारी अत्यंत व्यावहारिक और उपयोगी है। प्रधानाचार्य ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में न केवल पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति चेतना जागृत होती है, बल्कि वे अपने आसपास के समाज को भी जागरूक करने में सक्षम बनते हैं। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण एवं परियोजना से संबंधित कार्मिक उपस्थ्ति रहे।

किसान चौपाल का आयोजन


पंतनगर। 18 अगस्त 2026।
पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान, मेरठ द्वारा संचालित अखिल भारतीय पशु शोध समन्वित परियोजना-फ्रिजवाल द्वारा ग्राम गोविंदपुर कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र-सितारगंज में पशुपालकों एवं वैज्ञानिकों के बीच किसान चौपाल का आयोजन किया गया।

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किसान चौपाल का उद्घाटन, डा. बृजेश सिंह, प्राध्यापक, पशु प्रजनन विभाग एवं परियोजना अधिकारी द्वारा किया गया। डा. बृजेश सिंह द्वारा सभी पशुपालकों एवं परियोजना टीम के सदस्यों के उत्साहवर्धन करने के साथ-साथ परियोजना के उद्देश्य एवं इससे पशु पालकों को मिलने वाले लाभों पर प्रकाश डाला गया। डा. रिपुसुदन कुमार, सह-प्राध्यापक, पशु पोषण विभाग द्वारा पशु पोषण सम्बन्धित समस्याओं के समाधान के साथ-साथ उत्तम पशु आहार बनाने की विधि बताते हुए पशु पालन के सभी तकनीकी आयामों को अपनाकर उन्नत पशु पालन करने की सलाह दी गयी।


किसान चौपाल में पशुपालकों का पंजीकरण एवं सामग्री वितरण कु. आराधना फुलार व धन्यवाद प्रस्ताव श्री शिवांशु तिवारी द्वारा किया गया। किसान चौपाल में कुल 14 पशुपालकों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

Tags: GB Pant University

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