पंतनगर, 16 अक्टूबर 2026। विश्वविद्यालय में सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के खाद्य एवं पोषण विभाग के माध्यम से न्यूट्रिशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (एनएसआई), पंतनगर चैप्टर द्वारा विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर 16 अक्टूबर, 2026 को “विकसित भारत-2047 के संदर्भ में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा” विषय पर ऑनलाइन विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डा. अर्चना कुशवाहा, सचिव, एनएसआई, पंतनगर चैप्टर के स्वागत संबोधन से हुआ। मुख्य वक्ता डा. तारिक अहमद गनाई, एसोसिएट प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग, इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
व्याख्यान के दौरान डा. गनाई ने विश्व खाद्य दिवस की थीम “आज नवाचार करें, कल को समृद्ध बनाएं” पर चर्चा करते हुए खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में कृषि, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने खाद्य उपलब्धता में कृषि के योगदान, ग्रामीण आजीविका की सुरक्षा तथा खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों तक सुरक्षित, किफायती और पौष्टिक भोजन की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
डा. गनाई ने खाद्य सुरक्षा के चार प्रमुख स्तंभों, उपलब्धता, पहुंच, उपयोग और स्थिरता, को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि पर्याप्त खाद्य उत्पादन के बावजूद गरीबी, संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, असमान वितरण और पौष्टिक भोजन तक सीमित पहुंच के कारण भुखमरी एवं कुपोषण जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्होंने पौष्टिक आहार की उपलब्धता बढ़ाने, मोटे अनाज एवं दालों को प्रोत्साहित करने, खाद्य अपव्यय कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसानों की आय में वृद्धि तथा महिलाओं एवं बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में डा. नीतू डोभाल, सहायक प्राध्यापक, खाद्य एवं पोषण विभाग ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के आयोजन में डा. रीता सिंह रघुवंशी, संयोजक; डा. अर्चना कुशवाहा, सचिव; डा. नीतू डोभाल, कोषाध्यक्ष, एनएसआई-पंतनगर चैप्टर तथा विभाग के विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। व्याख्यान के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने मुख्य वक्ता के साथ संवाद किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 86 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।







