पंतनगर। 9 अप्रैल 2026। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के मशरूम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र में सशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना के अंतर्गत “मशरूम उत्पादन तकनीकी एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर 6 से 9 अप्रैल 2026 तक चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. जे.पी. जायसवाल, निदेशक संचार तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. पी. सिंह, संयुक्त निदेशक (शोध) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वयन मशरूम अनुसंधान केन्द्र के संयुक्त निदेशक डॉ. एस.के. मिश्र द्वारा किया गया।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रोफेसर जे.पी. जायसवाल ने वेजिटेरियन डाइट में मशरूम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्री क्षेत्रों में मछली भोजन का मुख्य अंग होती है और प्रोटीन का प्रमुख स्रोत मानी जाती है, उसी प्रकार पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में मशरूम को भी आहार का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि मशरूम उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन प्रदान करने के साथ-साथ सुपाच्य भी होता है। उन्होंने जानकारी दी कि विश्व स्तर पर वर्तमान में 440 लाख टन से अधिक मशरूम का उत्पादन हो रहा है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर लगभग 8 प्रतिशत है।
वहीं भारत में मशरूम उत्पादन 3.3 लाख टन से अधिक है, जो देश की जनसंख्या के अनुपात में अभी भी कम है। उन्होंने कहा कि लोगों में मशरूम उत्पादन के प्रति जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इसमें निरंतर वृद्धि की आवश्यकता है। इस दृष्टि से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मशरूम आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों की अपार संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
इस अवसर पर डॉ. पी.के. सिंह ने विश्वविद्यालय के मशरूम प्रशिक्षण केन्द्र के महत्व एवं इसके दीर्घकालीन योगदान को रेखांकित करते हुए मशरूम की विभिन्न प्रजातियों तथा उनके उत्पादन की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. एस.के. मिश्र द्वारा कम्पोस्ट निर्माण, बीज उत्पादन (स्पॉन), फसल कक्ष का रखरखाव तथा मशरूम आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इसके साथ ही कीट एवं रोग प्रबंधन पर भी प्रयोगात्मक कार्य कराए गए, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के चार राज्यों से आए 54 प्रशिक्षणार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बटन, ढिंगरी (ऑयस्टर) तथा दूधिया मशरूम के उत्पादन की आधुनिक विधियों के बारे में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर मशरूम अनुसंधान केन्द्र के विद्यार्थी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।







