देहरादून। जिज्ञासा यूनिवर्सिटी में “उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS): 5W’s और 1H दृष्टिकोण” विषय पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का शुभारंभ किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) शंकर रामामूर्ति ने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान में नई दिशा देने वाली एक समृद्ध बौद्धिक धरोहर बताया।
सोमवार को जिज्ञासा यूनिवर्सिटी में पांच दिवसीय “उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर एफडीपी का शुभारंभ हुआ, जिसमें शिक्षकों, शोधार्थियों और प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. (डॉ.) शंकर रामामूर्ति ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल प्राचीन परंपराओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देने वाली एक समृद्ध बौद्धिक धरोहर है।
कार्यक्रम के संयोजक प्रो. (डॉ.) सुरेश चंद्र नायक ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान, दर्शन, चिकित्सा और जीवन मूल्यों का समृद्ध भंडार है, जिसे वर्तमान शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।तकनीकी सत्र में डॉ. कुशाग्र ने “उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा: 5W’s और 1H के माध्यम से समझ” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं है, बल्कि यह जीवन, समाज और प्रकृति के संतुलन को समझने का एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करती है।
उन्होंने 5W’s (What, Why, When, Where, Who) और 1H (How) के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यवस्थित रूप से समझाने पर जोर दिया।इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) अजय जोशी ने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा को 5W’s और 1H दृष्टिकोण के माध्यम से समझना शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी होगा।
वहीं रजिस्ट्रार (प्रभारी) डॉ. योगेश नंदा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमारी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।इस मौके पर विभिन्न गणमान्य व्यक्ति एवं शिक्षक उपस्थित रहे।








