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स्वर्गीय डा. वाईएल नेने की आठवीं पुण्यतिथि पर स्मृति समारोह सम्पन्न

by Rajendra Joshi
January 16, 2026
in शिक्षा/रोजगार
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पंतनगर। 16 जनवरी, 2026। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के फसल अनुसंधान केन्द्र के सेन्टर फॉर वृक्षायुर्वेद रिसर्च एवं ट्रेनिंग सेन्टर में एशियन एग्री-हिस्ट्री फाउंडेशन (एएएचएफ) के मुख्यालय द्वारा फसल अनुसंधान केन्द्र के ब्लॉक डी. 07 में डा. वाईएल नेेने की आठवीं पुण्यतिथि का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं शुभारम्भ एशियन एग्री-हिस्ट्री फाउंडेशन की कार्यकारी सचिव डा. सुनीता टी. पाण्डे, प्रोफेसर, सस्य विज्ञान विभाग द्वारा किया गया। उन्होंने डा. वाईएल नेेने के विश्वविद्यालय मे किये गए उत्कृष्ट शोध एवं विकास सम्बन्धी प्रयासों का वर्णन करते हुए बताया कि डा. नेने द्वारा भारतवर्ष की गौरवशाली कृषि विरासत वृक्षायुर्वेद की प्रति इग्लैण्ड स्थित आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से वर्ष 1993 में प्राप्त कर एवं उसी क्रम में देश व विदेश के कोने-कोने से भारत की समृद्ध कृषि विरासत सम्बन्धी पाण्डुलिपियों यथा कृषि पराशर, विश्ववल्लभ, उपवनविनोद, कश्यपाकृषिसुक्ति, लोकोपकार इत्यादि का अंग्रेजी हिन्दी एवं मराठी में अनुवाद कर उसको कॉमैन्ट्री कर उस ज्ञान को कृषकों, नीति-निर्माताओं तथा वैज्ञानिकों के मध्य प्रचारित एवं प्रसारित करने हेतु स्वर्गीय डा. वाई.एल. नेने अपने जीवन के सक्रिय जीवन का योगदान दिया ताकि वर्तमान में जलवायु एवं पर्यावरण सम्बन्धी उभरती समस्याओं से भारतवर्ष के समृद्ध कृषि विरासत द्वारा निजात पाई जा सके।

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तदोपंरात अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय तथा अन्य गणमान्यों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत उपस्थित वैज्ञानिकांे, छात्र-छात्राओं तथा श्री गंगानगर राजस्थान से आए कृषकों के द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उसके उपरांत सभा में उपस्थित सभी सदस्यों द्वारा डा. वाईएल नेेने की स्मृति में अपने अनुभव साझा किये गये।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय डा. सुभाष चन्द्र द्वारा प्राकृतिक खेती को लोकप्रिय बनाने हेतु ओटोमेशन पर विषेश ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया गया। प्राध्यापक एवं निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल ने वर्तमान में प्राकृतिक खेती की महत्वता पर प्रकाश डालते हुए उसे भविष्य का महत्वपूर्ण शोध का विषय बताया। निदेशक शोध के प्रतिनिधि एवं संयुक्त निदेशक शोध डा. अमित भटनागर ने प्राकृतिक खेती पर अधिक तर्कसंगत शोध का किया जाने पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी आमंत्रित गणमान्यों को प्राध्यापक, सस्य विज्ञान डा. राजीव कुमार के द्वारा आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष, सस्य विज्ञान विभाग डा. अनिल शुक्ला तथा संकाय सदस्य, विद्यार्थी एवं राजस्थान के श्री गंगानगर से आए लगभग 20 किसानों ने भी प्रतिभाग किया, भारतीय ज्ञान परम्परा के सदस्य तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थी काफी संख्या में मौजूद थे।

Tags: GB Pant University

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