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पंतनगर विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय की आय को दोगुना करने की रणनीति पर मंथन

by Rajendra Joshi
August 11, 2026
in उधम सिंह नगर
0
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पंतनगर। 11 अगस्त, 2026। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय की वित्तीय आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने तथा विभिन्न महाविद्यालयों एवं इकाइयों के रिवॉल्विंग फंड को बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श बैठक आयोजित किया गया। बैठक में विष्वविद्यालय के कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप, विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशकगण एवं अनुसंधान केन्द्रों के संयुक्त निदेशक के साथ अन्ना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस डा. के. शंकरन ने सहभागिता की।


बैठक का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय की उपलब्ध बौद्धिक क्षमता, आधारभूत संसाधनों, शोध एवं तकनीकी उपलब्धियों का प्रभावी उपयोग करते हुए आय के नए एवं स्थायी स्रोत विकसित करना तथा रिवॉल्विंग फंड को दोगुना करने की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करना रहा। बैठक में स्पष्ट किया गया कि केवल शुल्क आधारित सीटों में वृद्धि से आय बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि विश्वविद्यालय की बौद्धिक संपदा, शोध एवं तकनीकी क्षमताओं को व्यावसायीकरण से जोड़ना आवश्यक है।

बैठक में अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय द्वारा स्ववित्तपोषित सीटों, उत्पादों की बिक्री, जैव उर्वरक, मृदा एवं खाद्य परीक्षण, प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम, परामर्श सेवाओं तथा तकनीकी व्यावसायीकरण के माध्यम से आय बढ़ाने की संभावनाएं प्रस्तुत की गईं। अधिष्ठात्री, सामुदायिक विज्ञान, वस्त्र एवं परिधान, खाद्य एवं पोषण, बाल विकास, डिजिटल मीडिया, उत्पादन इकाइयों, कौशल विकास, परीक्षण एवं परामर्श सेवाओं तथा विश्वविद्यालय के उत्पादों की बिक्री को भी आय सृजन से जोड़ने पर चर्चा हुई। अधिष्ठाता, पशु चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा शोध एवं नवाचार के व्यावसायीकरण, खनिज मिश्रण एवं अन्य उत्पादों के विकास, पेट एनिमल सेवाओं, वन हेल्थ, संक्रामक एवं जूनोटिक रोगों की डायग्नोस्टिक तकनीकों तथा कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को आय के संभावित स्रोत के रूप में चिन्हित किया गया। विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय द्वारा बहुविषयक शोध परियोजनाओं, स्ववित्तपोषित कार्यक्रमों, एनएबीएल प्रयोगशाला, परामर्श एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा नए स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के माध्यम से संसाधन सृजन की संभावनाएं प्रस्तुत की गईं।

अधिष्ठाता प्रौद्योगिकी महाविद्यालय द्वारा सेमीकंडक्टर सेंटर, 5जी लैब एवं अन्य प्रयोगशालाओं का व्यावसायिक उपयोग कर प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं तकनीकी सेवाओं, पेड सीट, प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण तथा उद्योग आधारित कंसल्टेंसी को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। अधिष्ठाता कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय द्वारा इंडस्ट्री स्पॉन्सर्ड सीटों की संख्या बढ़ाने, एमडीपी एवं ईडीपी कार्यक्रमों का व्यापक स्तर पर संचालन करने, उद्योग आधारित परियोजनाएं प्राप्त करने तथा नए स्ववित्तपोषित एग्री-बिजनेस पाठ्यक्रम शुरू करने पर चर्चा की गई।

अधिष्ठाता मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय द्वारा गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज एवं फिंगरलिंग उत्पादन बढ़ाने, विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के उत्पादन एवं बिक्री को बढ़ावा देने तथा आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों के माध्यम से आय में वृद्धि की संभावनाएं प्रस्तुत की गईं। निदेशक शोध एवं मुख्य महाप्रबंधक, विश्वविद्यालय फार्म द्वारा कृषि भूमि का बेहतर प्रबंधन, फसल उत्पादकता में वृद्धि, उच्च मूल्य वाली फसलों एवं बीज उत्पादन, व्यावसायिक फसलों तथा प्रसंस्करण को बढ़ावा देने और उपलब्ध भूमि एवं संसाधनों का वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक उपयोग, कृषि विज्ञान केन्द्रों, शोध केन्द्रों के माध्यम से विश्वविद्यालय की आय को दोगुना करने हेतु समयबद्ध एवं मात्रात्मक कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा की गई।


विशेषज्ञ डा. शंकरन ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए रैखिक नहीं बल्कि गुणात्मक एवं तीव्र विकास का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। उन्होंने शोध एवं बौद्धिक संपदा में निवेश, बाजार सर्वेक्षण, प्रोटोटाइप विकास, तकनीकी हस्तांतरण, रॉयल्टी मॉडल तथा छात्र एवं शिक्षक स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सुझाव दिया कि अगले छह माह में विश्वविद्यालय की वर्तमान परिसंपत्तियों एवं व्यावसायीकरण की संभावनाओं का आकलन कर एक क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना तैयार की जाए।


कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा कि विश्वविद्यालय की वास्तविक शक्ति उसकी बौद्धिक क्षमता और बौद्धिक संपदा में निहित है। उन्होंने कहा कि केवल भुगतान आधारित सीटों अथवा अन्य प्रशासनिक उपायों से आय बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। विश्वविद्यालय के शोध, तकनीक, विशेषज्ञता एवं उपलब्ध संसाधनों को नए आय-सृजन मॉडल से जोड़ते हुए ऐसी परियोजनाएं तैयार की जानी चाहिए, जिन्हें निर्धारित समयसीमा में धरातल पर लागू किया जा सके। बैठक में प्राप्त सुझावों के आधार पर ठोस परियोजनाओं एवं समयबद्ध कार्ययोजना में परिवर्तित करने पर सहमति व्यक्त की गई।

Tags: GB Pant University

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