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पेपर लीक आक्रोश के बीच उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय परीक्षा के दो पेपर ऑउट, एग्जाम रद्द, 12 इंजीनियरिंग संस्थानों पर प्रभाव

by Rajendra Joshi
July 23, 2026
in उत्तराखंड
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उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रश्नपत्र लीक होने से हजारों विद्यार्थियों पर इसका सीधा असर पड़ा है. जिसके बाद अब विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देनी होगी-

देहरादून (उत्तराखंड):देश में पेपर लीक के मामलों को लेकर युवाओं के आक्रोश के बीच देहरादून से एक और हैरान करने वाली खबर सामने आई है. दरअसल इस बार उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की परीक्षा में पेपर लीक का प्रकरण सामने आया है. खास बात यह है की परीक्षा से पहले ही पेपर लीक का मामला सामने आते ही विश्वविद्यालय ने दो परीक्षाओं को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए हैं. उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वीके पटेल ने भी प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि दोनों विषयों की परीक्षाएं निरस्त कर दी गई हैं और अब इनका आयोजन दोबारा किया जाएगा.

उत्तराखंड में परीक्षाओं की पारदर्शिता और व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. देहरादून स्थित उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की सेमेस्टर परीक्षाओं के दो प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही लीक होने का मामला सामने आया है. प्रश्नपत्रों के लीक होने की पुष्टि के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों विषयों की परीक्षाओं को निरस्त कर दिया है. इस घटनाक्रम का सीधा असर विश्वविद्यालय से जुड़े 12 इंजीनियरिंग संस्थानों के हजारों विद्यार्थियों पर पड़ा है.

पेपर लीक का यह मामला मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स और इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड थ्योरी विषयों की परीक्षाओं से संबंधित है. इन दोनों विषयों की परीक्षाएं आयोजित होने वाली थीं, लेकिन इससे पहले ही प्रश्नपत्र छात्रों के बीच पहुंचने की सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन को मिली. मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय ने तत्काल स्तर पर जांच शुरू कराई, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्र कहां से लीक हुए और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है.

कुलपति के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई. समिति ने जांच के दौरान संबंधित लोगों से जानकारी जुटाने के साथ ही पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की. जांच के बाद यह सामने आया कि परीक्षा से पहले ही एक इंजीनियरिंग कॉलेज में तैनात प्रोफेसर ने प्रश्नपत्र कुछ छात्रों तक पहुंचाए थे.

जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि की गई. रिपोर्ट सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों विषयों की परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया. साथ ही मामले में जिम्मेदार बताए जा रहे संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें अगले सात वर्षों तक परीक्षा से जुड़े किसी भी कार्य में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया है.

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया है.दोनों विषयों की परीक्षाएं निरस्त कर दी गई हैं और अब इनका आयोजन दोबारा किया जाएगा.
-डॉ. वीके पटेल,परीक्षा नियंत्रक,उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय-

विश्वविद्यालय के अनुसार नई परीक्षाएं अगस्त के तीसरे सप्ताह में प्रस्तावित हैं. हालांकि परीक्षा की अंतिम तारीख और परीक्षा केंद्रों की जानकारी बाद में जारी की जाएगी. विश्वविद्यालय के इस फैसले से उन हजारों छात्रों की परीक्षा प्रभावित हुई है, जो इन दोनों विषयों की सेमेस्टर परीक्षाओं को पहले ही दे चुके थे. विश्वविद्यालय से संबद्ध करीब 12 इंजीनियरिंग संस्थानों के विद्यार्थियों को अब दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी होगी.

पेपर लीक की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब देशभर में परीक्षा और भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों को लेकर युवाओं में नाराजगी देखी जा रही है. उत्तराखंड में भी बीते वर्षों में कई प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आ चुके हैं. ऐसे में तकनीकी विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने से एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता पर सवाल उठने लगे हैं. फिलहाल विश्वविद्यालय ने मामले की आंतरिक जांच के आधार पर परीक्षाएं निरस्त कर दी हैं और संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई भी की है. अब नई परीक्षा अगस्त में कराए जाने की तैयारी है. जिसके लिए तारीख का ऐलान बाद में अलग से होगा.

बता दें कि इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर ने प्रश्न पत्र से जुड़े कई क्वेश्चन छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप में डाले थे. पेपर हुए तो वही प्रश्न पेपर में आने पर यह पूरा मामला खुला. बिना नाम से एक मेल विश्वविद्यालय और इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशकों को भेजा गया और इसी शिकायत पर यह पूरी जांच की गई. इंजीनियरिंग कॉलेज ने एक आंतरिक जांच थी, जिसमें पेपर के लीक होने की पुष्टि हुई. इसके बाद विश्वविद्यालय ने भी अपने स्तर पर एक जांच करवाई और इसी के बाद यह पेपर रद्द किया गया.

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