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एक दिवसीय अनुसूचित जाति हेतु खरपतवार प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं गाजर घास जागरूकता सप्ताह का आयोजन

by Rajendra Joshi
August 19, 2026
in देहरादून
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पंतनगर। 19 अगस्त 2026। गाजर घास जागरूकता सप्ताह के चौथे दिन एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम एवं अनुसूचित जाति वर्ग के लिए खरपतवार प्रबंधन प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जनता पूर्व माध्यमिक विद्यालय, चित्रकूट, तिवारी नगर, बिंदुखत्ता, लालकुआं में परियोजनाधिकारी डा. एस. पी. सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ।


इस अवसर पर डा. सिंह ने बताया कि गाजर घास न केवल फसलों की पैदावार में गिरावट लाती है, बल्कि इसके संपर्क में आने से इंसानों में त्वचा एवं श्वास संबंधी गंभीर बीमारियां होती हैं। दुधारू पशुओं द्वारा खानेे से उनके दूध एवं उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने गाजर घास के रोकथाम के लिए बताया कि गाजर घास के आस-पास गेंदा का पौधा, लठजीरा, केसियां तोरा एवं ‘जाइगोग्राम बाइकोलेरेटा‘ नामक मेक्सिकन बीटल कीट का उपयोग करना चाहिये तथा इसके रासायनिक रोकथाम के लिए ग्लाइफोसेट, पेराक्वाट एवं 2,4 डी का छिड़काव करना चाहिए। गाजर घास को उखाड़ते समय हाथों में दस्ताने और चेहरे पर मास्क अवश्य पहनें ताकि एलर्जी से बचा जा सके।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रदीप कुमार गंगवार ने डा. एस. पी. सिंह का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि ‘गाजर घास एक बेहद ढीठ खरपतवार है, जिसे कितना भी उखाड़कर फेंको, यह बार-बार पनप जाती है। इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए जनता को और अधिक जागरूक होना पड़ेगा। साथ ही, आम लोगों को एकजुट होकर सरकार से मांग करनी चाहिए कि वह इसे मूल रूप से नष्ट करने के लिए ठोस और स्थायी उपाय करे।‘ कार्यक्रम में कमलेश वर्मा, प्रधानाचार्य, राजकीय प्राथमिक विद्यालय; जगदीश प्रसाद, सहायक अध्यापक; तारा गोस्वामी, शिक्षिका, शिक्षा क्षेत्र और स्थानीय समाज के कई गणमान्य लोग के अतरिक्त क्षेत्र के आसपास के किसानों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।


इसी क्रम में डा. एस. पी. सिंह द्वारा अनुसूचित जाति के किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से खरपतवार प्रबंधन पर एक-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने किसानों को फसलों में होने वाले अनावश्यक खरपतवारों को नियंत्रित करने के आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया एवं किसानों को रसायनों के सही इस्तेमाल के साथ-साथ आधुनिक कृषि यंत्रों द्वारा खरपतवार हटाने की तकनीक बतायी गई। सही समय पर खरपतवार प्रबंधन करने से फसल की लागत में कमी आती है और गुणवत्तापूर्ण पैदावार में बढ़ोतरी होती है।


प्रगातिशील किसान करन बिष्ट द्वारा गन्ने की फसल में मोथे की समस्या, धान में खैरा रोग एवं आम व लीची के जड़ो में मिली बग की समस्या बतायी गयी, जिसका निदान डा. एस.पी. सिंह द्वारा किया गया एवं अन्य किसानों द्वारा पूछे गये प्रश्नों का भी समाधान किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी लाभार्थी किसानों को खरपतवार प्रबंधन से सम्बन्धित लीफलेट का वितरित किया गया।

Tags: GB Pant University

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