पंतनगर। 2 मार्च, 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल हरियाणा के सौजन्य से पंतनगर विश्वविद्यालय में संचालित अखिल भारतीय समन्वित गेहूँ एवं जौ अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति उप योजना (एस.सी.एस.पी.) के किसानों को कृषि के क्षेत्र में सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से निःशुल्क कृषि सामग्री वितरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिनांक 20-28 फरवरी, 2026 को जनपद नैनीताल के सूरिया ग्राम, मझेड़ा एवं जनपद उधमसिंह नगर के ढकिया कलां ग्राम, काशीपुर, जसपुर एवं कोटाबाग के कृषि ग्रामीणों के लिए आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 300 से ज्यादा लाभार्थी किसान उपस्थित रहे।अनुसूचित जाति उप योजना (एस.सी.एस.पी.) के परियोजना अधिकारी डा. जे.पी. जायसवाल ने बताया कि इस वितरण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना, उत्पादन लागत को कम करना तथा फसल उत्पादकता में वृद्धि करना है।
कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को खरपतवारनाशी, नैनो यूरिया (तरल उर्वरक), दरांती, खुरपी तथा रबी फसलों की उन्नत खेती संबंधी पुस्तिकाएं निशुल्क प्रदान की गईं। इन सामग्रियों के माध्यम से किसानों को खरपतवार नियंत्रण, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा खेत की नियमित देख-रेख में सुविधा प्राप्त होगी।कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को रबी फसलों में समय पर बुवाई, उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, कीट एवं खरपतवार नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों तथा आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि नैनो यूरिया के प्रयोग से फसल को त्वरित पोषण मिलता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि संभव है। वहीं खरपतवारनाशी के उचित उपयोग से खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है, जिससे फसल को पोषक तत्वों की प्रतिस्पर्धा कम होती है।
इस अवसर पर प्राध्यापक डा. राजीव कुमार, डा. अमित केसरवानी, डा. स्वाति, डा. अनिल कुमार, राम प्रवेश राजभर एवं पुष्पेंद्र मिश्रा द्वारा किसानों से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को सुना गया तथा वैज्ञानिक समाधान किया गया। अधिकारियों ने कहा कि सरकार एवं कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना और उन्हें नवीन तकनीकों से अवगत कराना है।कार्यक्रम के दौरान किसानों में उत्साह एवं जागरूकता देखने को मिली। लाभार्थी किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती हैं। निःशुल्क उपलब्ध कराई गई सामग्री से उन्हें आर्थिक सहायता के साथ-साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ है। यह कार्यक्रम अनुसूचित जाति किसानों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा और क्षेत्र में कृषि विकास को नई दिशा प्रदान करेगा।








