गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कृषि संचार विभाग, कृषि महाविद्यालय द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से वित्तपोषित जनजातीय उप योजना के अंतर्गत 27–28 फरवरी 2026 को “उद्यानिकी एवं औषधीय पौधों की खेती को आजीविका संवर्धन हेतु प्रोत्साहन” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विकासखंड गदरपुर के ग्राम कुल्हा की अनुसूचित जनजाति की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए उद्यानिकी एवं औषधीय फसलों की वैज्ञानिक खेती से संबंधित नवीन तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निदेशक संचार डॉ. जे. पी. जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि उद्यानिकी एवं औषधीय फसलों की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ स्वरोजगार के व्यापक अवसर प्रदान करती है। विशिष्ट अतिथि डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. ए. एस. जीना ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सामाजिक विकास की आधारशिला बताते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। सैमेटी प्रभारी डॉ. बी. डी. सिंह ने बाजारोन्मुख उत्पादन एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रोफेसर डॉ. निर्मला भट्ट ने औषधीय पौधों की उपयोगिता, मूल्य संवर्धन एवं विपणन की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन जनजातीय उप योजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. अर्पिता शर्मा कंडपाल के निर्देशन में संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य जनजातीय महिलाओं को तकनीकी ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान कर उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।
प्रशिक्षण के दौरान सैद्धांतिक व्याख्यानों के साथ नर्सरी प्रबंधन, पौधारोपण, जैविक खेती, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा कटाई उपरांत प्रबंधन जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रदर्शन भी आयोजित किए गए। समापन सत्र में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें नवीन जानकारी एवं आत्मविश्वास प्राप्त हुआ है। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
यह कार्यक्रम जनजातीय महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी एवं सराहनीय पहल सिद्ध हुआ।








