पंतनगर। कृषि संचार विभाग, गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वित्तपोषित जनजातीय उप योजना (ट्राइबल सब प्लान-टीएसपी) के अंतर्गत 13-14 फरवरी 2026 को ‘दुग्ध आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों के विकास एवं उनके विपणन के माध्यम से जनजातीय महिलाओं का सशक्तिकरण’ विषय पर दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ब्लॉक गदरपुर के ग्राम खटोला की अनुसूचित जनजाति (एसटी) महिलाओं ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित निदेशक प्रसार शिक्षा डा. जितेन्द्र क्वात्रा द्वारा किया गया। इस अवसर पर निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. ए.एस. जीना, प्रोफेसर प्रसार शिक्षा डा. निर्मला भट्ट, प्रोफेसर के.वी.के. डा. अजय प्रभाकर तथा पशु चिकित्सा महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुनील कुमार एवं श्रीमती विंध्यवासिनी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल आयोजन जनजातीय उप योजना की प्रधान अन्वेषक डा. अर्पिता शर्मा कंडपाल के नेतृत्व में किया गया।
निदेशक प्रसार शिक्षा डा. जितेन्द्र क्वात्रा ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार बताते हुए मूल्य संवर्धन के माध्यम से आय बढ़ाने पर बल दिया।

निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल ने कहा कि दुग्ध आधारित उत्पादों की उचित पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं प्रभावी विपणन रणनीतियों को अपनाकर महिलाएं बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं। उन्होंने समूह आधारित उद्यमिता को सफलता की कुंजी बताया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. ए.एस. जीना ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कौशल विकास ही आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने प्रतिभागी महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ उद्यम प्रारंभ करने तथा निरंतर सीखते रहने के लिए प्रेरित किया। प्रोफेसर प्रसार शिक्षा डा. निर्मला भट्ट ने कहा कि दुग्ध उत्पादों में वैल्यू एडिशन के माध्यम से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने प्रसार शिक्षा की भूमिका को महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। प्रोफेसर के.वी.के. डा. अजय प्रभाकर ने दुग्ध उत्पादन में संतुलित चारे, वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों एवं पोषण प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रबंधन से उत्पादन एवं लाभ दोनों में वृद्धि संभव है। पशु चिकित्सा महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुनील कुमार ने पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, नियमित टीकाकरण एवं स्वच्छता बनाए रखने के उपायों पर प्रकाश डाला और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन के लिए इन्हें आवश्यक बताया।
कार्यक्रम की प्रधान अन्वेषक डा. अर्पिता शर्मा कांडपाल ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस पहल का उद्देश्य जनजातीय महिलाओं को तकनीकी ज्ञान, विपणन कौशल एवं आवश्यक संसाधनों से सशक्त बनाना है, ताकि वे दुग्ध आधारित उद्यमिता के माध्यम से सतत आय अर्जित कर सकें। समापन सत्र में प्रतिभागी महिलाओं ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नई प्रेरणा मिली है। जनजातीय उप योजना के अंतर्गत प्रतिभागियों को प्रशिक्षण सामग्री एवं आवश्यक इनपुट वितरित किए गए, जिससे वे अपने गांव स्तर पर दुग्ध आधारित मूल्य संवर्धित उद्यम प्रारंभ कर सकें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जनजातीय महिलाओं के ज्ञान, कौशल एवं आत्मविश्वास में वृद्धि करने के साथ-साथ उन्हें सतत आजीविका एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अग्रसर करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।








