पंतनगर। 11 मार्च 2026। विश्वविद्यालय में कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान की अध्यक्षता में 119वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के आयोजन से पूर्व आज प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक का आयोजन कुलपति सभागार में किया गया। इस अवसर पर कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान के साथ निदेशक प्रसार शिक्षा डा. जितेन्द्र क्वात्रा, निदेशक शोध डा. एस. के. वर्मा, निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल एवं पिं्रट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान ने बताया कि 119वें अखिल भारतीय किसान मेले की थीम ‘सशक्त महिला – समृद्ध खेती’ है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि की प्रगति में महिलाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। खेतों में श्रम, पशुपालन, बीज संरक्षण, खाद्य प्रसंस्करण तथा परिवार और कृषि प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में महिलाएँ निरंतर अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं। आज आवश्यकता है कि हम उनकी इस भूमिका को और अधिक सशक्त बनाते हुए उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों, प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधनों और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ें। जब ग्रामीण महिला सशक्त होगी, तभी खेती वास्तव में समृद्ध और टिकाऊ बन सकेगी। इसके अलावा, किसानों को उन्नत धान, बागवानी एवं सब्जियों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। कृषि अनुसंधान से जुड़े नवीनतम नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने कोदो, झिंगोरा और मंडुआ जैसी पारंपरिक फसलों की बढ़ती महत्ता और उनकी संभावित उच्च बाजार कीमतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विष्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकी जानकारी को और अधिक बढ़ाया जाना है, जिससे किसान उन तकनीकों को अपनी खेती में अपनाकर आय में वृद्धि कर सके। इस मेले में विष्वविद्यालय की ओर से विकसित खरीफ की विभिन्न फसलों एवं सब्जियों आदि की बीज प्रदर्शनी लगेगी।
विष्वविद्यालय द्वारा मेले में आने वाले किसानों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएँ की जा रही हैं। इसके साथ ही मेले में एक स्थान पर किसानों के एकत्र होने तथा स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि दूर-दराज से आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि इस किसान मेले में विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों द्वारा पिछले दो वर्षों में किए गए शोध कार्यों, नवाचारों तथा आधुनिक कृषि तकनीकों पर आधारित विशेष स्टॉल लगाया जाएगा। इस विशेष स्टॉल के माध्यम से किसानों को विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई फसल प्रजातियों, उन्नत बीजों तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी, जिससे किसान सीधे तौर पर लाभान्वित हो सकेंगे।

उन्होंने कहा कि किसान मेले में उत्तराखण्ड राज्य के अलावा देश के विभिन्न राज्यों से भी बड़ी संख्या में किसान भाग लेने के लिए पंतनगर विष्वविद्यालय पहुंचेंगे। किसान यहां विष्वविद्यालय द्वारा विकसित नवीन प्रजातियों, शोध कार्यों एवं तकनीकों की जानकारी विभिन्न अनुसंधान केन्द्रों से विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर प्राप्त कर सकेंगे। चार-दिवसीय इस किसान मेले के दौरान किसान गोष्ठियों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें विष्वविद्यालय के वैज्ञानिक किसानों की समस्याओं को सुनेंगे तथा उनके समाधान के लिए वैज्ञानिक सलाह और मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि यह मेला किसानों के लिए नई तकनीकों और ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
निदेशक प्रसार शिक्षा, डा. जितेन्द्र क्वात्रा ने बताया कि कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान के नेतृत्व में 119वंे अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्षनी का आयोजन 13 से 16 मार्च 2026 तक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस किसान मेले में छोटे-बड़े स्टालों सहित अब तक 350 स्टाल बुक हो चुके है, जिनमें 150 बड़े एवं 200 छोटे स्टाल है और इनकी संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस बार किसान मेले में 18 से 20 हजार से अधिक किसानों को आने की सम्भावना है। किसानों की ठहरने की व्यवस्था मेला प्रांगण में ही किया गया है। उन्होंने बताया कि 119वें अखिल भारतीय किसान मेले कृषि एवं उद्योग प्रदर्शनी का उद्घाटन 14 मार्च 2026 को मुख्य अतिथि माननीय मुख्यमंत्री, उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी एवं विशिष्ट अतिथि माननीय मंत्री कृषि एवं कृषक कल्याण, उत्तराखण्ड गणेश जोशी, सांसद नैनीताल-ऊधमसिंह नगर अजय भट्ट के साथ विधायक, विश्वविद्यालय प्रबंध परिषद के सदस्य, जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में अपराहन 3ः00 बजे किया जायेगा।
प्रेस वार्ता के प्रारम्भ में निदेशक संचार डा. जे. पी. जायसवाल द्वारा सभी का स्वागत करते हुए कहा गया कि कुलपति जी के नेतृत्व में जहां एक ओर स्टालों की संख्या उत्तरोतर बढी है वही किसानों की संख्या भी बढ़ी है। मेले को सफल बनाने में मीडिया के योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने उसी प्रकार की अपेक्षा 119वें किसान मेला को सफल बनाने के लिए भी की। बैठक के अंत में उन्होंने सभी उपस्थित पिं्रट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
अनुसूचित जाति महिलाओं में उद्यमिता विकास हेतु कार्यक्रम आयोजित
पंतनगर। 11 मार्च 2026। अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वित्तपोषित परियोजना ‘मशरूम एवं दुग्ध आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों के माध्यम से पहाड़ी अनुसूचित जाति महिलाओं में उद्यमिता विकास’ के तहत जनपद पिथौरागढ़ के विकासखंड डीडीहाट के विभिन्न गांवों में बेसलाइन सर्वे एवं एक्सपोज़र विजिट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों की अनुसूचित जाति की महिलाओं को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना तथा उन्हें मशरूम उत्पादन और दुग्ध आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण के माध्यम से उद्यमिता की ओर प्रेरित करना है।
कार्यक्रम के दौरान ओढ़गांव, लोहार तथा वरायल गांव की अनुसूचित जाति की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर महिलाओं से उनके वर्तमान आजीविका स्रोतों, कृषि एवं पशुपालन से संबंधित गतिविधियों तथा उनकी प्रशिक्षण आवश्यकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए बेसलाइन सर्वे भी किया गया। इसके अतिरिक्त महिलाओं को सफल उद्यमिता के उदाहरणों से अवगत कराने और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने के लिए एक्सपोज़र विजिट का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में परियोजना अन्वेषक डा. अर्पिता शर्मा कंडपाल, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र पिथौरागढ़ ने महिलाओं को संबोधित करते हुए मशरूम उत्पादन की उन्नत तकनीकों, उसके पोषण महत्व तथा कम लागत में अधिक आय प्राप्त करने की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन एक ऐसा उद्यम है जिसे कम स्थान और सीमित संसाधनों के साथ भी आसानी से अपनाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने दुग्ध से बनने वाले विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों जैसे पनीर, घी, दही, फ्लेवर्ड मिल्क आदि के निर्माण एवं विपणन की संभावनाओं के बारे में भी महिलाओं को जागरूक किया।

इस अवसर पर डा. कंचन आर्या, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र पिथौरागढ़ ने भी महिलाओं को कृषि आधारित लघु उद्यमों के महत्व के बारे में बताया और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं संगठित होकर समूह के रूप में इन गतिविधियों को अपनाती हैं, तो वे न केवल अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं बल्कि अपने परिवार और समाज के आर्थिक सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कार्यक्रम में पंकज कुमार, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर भी उपस्थित रहे। उन्होंने परियोजना के उद्देश्यों एवं आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में महिलाओं को जानकारी दी तथा उन्हें परियोजना से अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित महिलाओं ने मशरूम उत्पादन एवं दुग्ध आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों से संबंधित जानकारी को अत्यंत उपयोगी बताते हुए ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नई तकनीकों को सीखने और उन्हें अपनाने की इच्छा व्यक्त की।








