हल्द्वानी, 23 फरवरी 2026। Free Smile Foundation द्वारा Sushila Tiwari Government Medical College के प्राचार्य को एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर संस्थान में सामने आए गंभीर आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई तो प्रकरण को माननीय उच्च न्यायालय एवं अन्य सक्षम प्राधिकारों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
संस्था के संस्थापक-अध्यक्ष रवि त्यागी द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि महाविद्यालय के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के एक सहायक प्राध्यापक के विरुद्ध छात्रों से संबंधित कई गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। आरोपों में कक्षा में अपमानजनक एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग, छात्रों के प्रति लैंगिक एवं जातिगत टिप्पणियां, परीक्षा में जानबूझकर असफल करने की धमकी, उपस्थिति अभिलेखों में कथित हेरफेर, छात्राओं एवं दिव्यांग छात्र के प्रति अनुचित व्यवहार तथा मानसिक दबाव बनाने जैसी शिकायतें शामिल हैं।
पत्र में यह भी कहा गया है कि संगठन के पास कुछ घटनाओं से संबंधित छायाचित्र एवं ध्वनि-चित्र (ऑडियो-वीडियो) साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के एंटी-रैगिंग विनियम, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न निवारण संबंधी प्रावधान, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
फाउंडेशन ने महाविद्यालय प्रशासन से 24 घंटे के भीतर एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने, एंटी-रैगिंग समिति, आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी), शिकायत निवारण प्रकोष्ठ तथा एससी/एसटी समिति की वर्तमान स्थिति और कार्यप्रणाली की लिखित जानकारी उपलब्ध कराने तथा छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु तत्काल अंतरिम उपाय करने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि इस विषय पर पूर्व में भी पत्राचार किया गया था, किंतु अब तक कोई औपचारिक एवं स्पष्ट कार्रवाई दृष्टिगोचर नहीं हुई है। ऐसी स्थिति में संस्थान के आंतरिक तंत्र की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
फ्री स्माइल फाउंडेशन ने छात्र-हित एवं संस्थान की गरिमा बनाए रखने के लिए त्वरित, पारदर्शी एवं जवाबदेह कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की है।








