पंतनगर, 7 अप्रैल 2026। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान के नेतृत्व में 37वें दीक्षांत समारोह का सफलतापूर्वक समापन हुआ। समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह मुख्य अतिथि तथा कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी और सांसद नैनीताल अजय भट्ट विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कुलसचिव डॉ. दीपा विनय भी मंचासीन रहीं।
मुख्य अतिथि राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में दीक्षांत समारोह के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे आध्यात्मिकता और पूर्णता का प्रतीक बताया। उन्होंने ‘नए युग’ की अवधारणा पर बल देते हुए विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और विश्व गुरु बनने के लक्ष्य को विद्यार्थियों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, साइबर टेक्नोलॉजी और स्पेस साइंस जैसी आधुनिक तकनीकों ने दुनिया को तेजी से बदल दिया है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि वे विश्वभर में अपनी पहचान बना रहे हैं और हरित क्रांति जैसे ऐतिहासिक कार्यों में योगदान दे चुके हैं। विश्वविद्यालय द्वारा शहद, मिलेट्स (श्री अन्न) और अरोमा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य व कृषि के लिए महत्वपूर्ण बताया। कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने संतुलित जीवनशैली और पोषण के महत्व पर भी जोर दिया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे अब केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक और भावी नेता हैं। उन्होंने युवाओं से नौकरी खोजने के बजाय रोजगार सृजनकर्ता बनने और स्टार्टअप, एग्री-बिजनेस तथा फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। साथ ही ‘लैब से लैंड’ और ‘फाइल से फील्ड’ की अवधारणा को अपनाने पर जोर दिया।
समारोह में कुल 1,395 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जबकि 36 मेधावी छात्रों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि को विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया गया। संबोधन के अंत में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
गणेश जोशी ने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताते हुए कहा कि यही वह पावन भूमि है, जिसने हरित क्रांति को नई दिशा दी और देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत फसलों—पंत धान, पंत गेहूं, पंत मक्का, पंत सरसों और पंत सोयाबीन—का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आज भी देशभर के किसानों के लिए विश्वास का प्रतीक हैं।
उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रयोगशालाओं में विकसित ज्ञान को सीधे खेतों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से करोड़ों किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है। साथ ही उत्तराखंड सरकार की योजनाओं—मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, फल प्रोत्साहन योजना, जैविक खेती योजना और सूक्ष्म सिंचाई योजना—का भी उल्लेख किया।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023 का जिक्र करते हुए मिलेट्स (श्री अन्न) के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि यह अब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यवर्धक आहार के रूप में स्थापित हो चुका है।
अजय भट्ट ने कहा कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों—अल्मोड़ा, हल्द्वानी एवं अन्य संस्थानों—में उत्कृष्ट कार्य हो रहा है, जिससे भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालय वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा तीन बार ‘सरदार पटेल आउटस्टैंडिंग इंस्टीट्यूशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक 46,643 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की जा चुकी है।
कुलसचिव डॉ. दीपा विनय ने समारोह का संचालन किया एवं अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।







