पंतनगर। विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग में ‘जलवायु परिवर्तन से फसलों में हो रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं एवं उनका प्रबंधन’ विषय पर 21-दिवसीय उच्च संकाय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलसचिव डा. दीपा विनय ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। उद्घाटन सत्र में डा. दीपा विनय ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में हुए अनुसंधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार आवश्यक है। कृषि वैज्ञानिकों को किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कृषि को उद्योग का दर्जा देना होगा तथा खेती में आधुनिक मशीनरी का अधिक से अधिक समावेश करना समय की मांग है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिष्ठाता कृषि डा. सुभाष चंद्रा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों में रोगों से 25 से 30 प्रतिशत तक नुकसान हो रहा है, जिसे जैव सघन रोग प्रबंधन पद्धतियों को अपनाकर कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश की जनसंख्या 140 करोड़ की ओर बढ़ रही है, ऐसे में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन के कारण गौण बीमारियां अब प्रमुख बीमारियों में परिवर्तित हो रही हैं, जिनके नियंत्रण हेतु नवीन तकनीकों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि बीते कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण लगभग 20 प्रतिशत फसल उत्पादन प्रभावित हुआ है। इस अवसर पर उन्होंने धान की खैरा बीमारी का उल्लेख करते हुए पादप रोग विज्ञान विभाग के ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा में पादप रोग वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा नई तकनीकों जैसे रिमोट सेंसिंग एवं कंप्यूटर मॉडलिंग को रोग अध्ययन में शामिल करना आवश्यक है, ताकि समय पर किसानों तक जानकारी पहुंचाई जा सके।
कार्यक्रम में निदेशक, उच्च संकाय प्रशिक्षण केंद्र डा. योगेंद्र सिंह ने पादप रोग विज्ञान विभाग की ओर से प्रशिक्षणार्थियों एवं अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने विभाग में हो रहे शोध, प्रसार एवं शिक्षा संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी तथा पूर्व में विभाग के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों द्वारा किए गए उत्कृष्ट शोध कार्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। 21-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान द्वारा शुभकामनाएं दी गयी। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा कमाक्षी कांडपाल द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव वरिष्ठ शोध अधिकारी डा. दीपशिखा ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विभाग के सभी वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों सहित देश के आठ राज्यों से आए 21 सहायक प्राध्यापक एवं विषय वस्तु विशेषज्ञों ने सहभागिता की।








