पंतनगर। 28 सितम्बर 2026। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप की अध्यक्षता में कुलपति सभागार में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।
प्रेस वार्ता में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने बताया कि आगामी 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस वर्ष किसान मेले की थीम ‘स्मार्ट खेती, स्वस्थ धरती, समृद्ध किसान’ है। मेले में आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ प्राकृतिक खेती, उन्नत बीज, कृषि यंत्र, ड्रोन तकनीक, कृषि स्टार्टअप तथा पारंपरिक फसलों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस किसान मेले में लगभग बड़े एवं छोटे कुल 400 से अधिक स्टॉल लगाए जाने की सम्भावना है। इन स्टॉलों के माध्यम से किसानों को कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों से जुड़ी नवीन तकनीकों, उत्पादों, कृषि यंत्रों, बीजों तथा उपयोगी सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। गेहूं, मक्का, मटर, तिलहनी फसलों सहित विभिन्न फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा।
निदेशक शोध ने बताया कि गत वर्श की तुलना में उपरोक्त फसलों का डेढ़ गुना अधिक प्रजनक बीज तैयार किया गया है। गेहूं की विभिन्न प्रजातियों का 2039 कुंतल, जौ का 5 कुंतल, मसूर का 50 कुंतल, चना का 26 कुंतल और तिलहन का 100 कुंतल प्रजनक बीज के अतिरिक्त उद्यान एवं वानिकी वृक्षों के पौध तथा सब्जियों के विभिन्न फसलों के बीज उपलब्ध रहेंगे और इनके मूल कीमत पर 15 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाएगी। मुख्य महाप्रबंधक, विश्वविद्यालय फार्म ने बताया कि गेहूं की विभिन्न प्रजातियों का 2040 कुंतल बीज तैयार किया गया है जो कि आधारीय बीज, प्रमाणित बीज और टीएल बीज के रुप में उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस बार मेले में तीन विशेष स्टाल यथा शोध आधारित नवोन्मेशी, पारम्परिक खेती की विधियों एवं बीजों के संरक्षण तथा एग्री-स्टार्टअप पर लगाये जाएंगे। इसमें कृषि क्षेत्र के नवाचारों, पारंपरिक कृषि पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। किसानों को उन्नत किस्मों, प्रमाणित बीजों और कृषि क्षेत्र में उपलब्ध नवीन विकल्पों से भी परिचित कराया जाएगा। कुलपति ने कहा कि किसान मेला केवल कृषि उत्पादों एवं तकनीकों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह किसानों, वैज्ञानिकों, युवाओं, उद्यमियों और कृषि संस्थानों के बीच संवाद तथा तकनीक हस्तांतरण का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं शोध केंद्रों द्वारा विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन और संवाद की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को खेतों तक पहुंचाने के साथ युवाओं को कृषि आधारित रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना भी है। 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी उद्घाटन 3 अक्टूबर 2026 प्रातः 11ः00 बजे माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड द्वारा किया जायेगा।
तदोपरांत कुलपति ने बताया कि देश के शिक्षित युवकों एवं युवतियों को ड्रोन तकनीकी प्रशिक्षण में उद्यमिता विकास के लिए गन्ना अनुसंधान केन्द्र काशीपुर में रिमोट पायलट प्रशिक्षण संस्थान (आरपीटीओ) की स्थापना की है जिसकी अनुमति डी.जी.सी.ए. भारत सरकार द्वारा प्रदत की गई है। प्रारम्भ में यह अनुमति संस्थान को दस वर्षों के लिए दी गयी है जिसे भविष्य में अनुमति द्वारा दस वर्षों के लिए और बढ़ाया जा सकता है। ड्रोन को संचालन के लिए आवश्यक आर्हता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से दसवीं की परीक्षा उत्तीण की हो तथा जिसकी उम्र 18 से 60 वर्ष के मध्य हो, इस केन्द्र से 5 दिन का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते है। इस प्रशिक्षण में ड्रोन के मूल सिद्धान्तों, नियमों तथा संचालन सम्बन्धी प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रशिक्षण के उपरान्त डी.जी.सी.ए. भारत सरकार द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा जिसकी वैधता 10 वर्ष की होगी। प्रमाण पत्र निर्गत होने के पश्चात् पायलट ड्रोन का संचालन करने का अधिकार प्राप्त कर लेता है। यह केन्द्र मुख्यतः उत्तराखण्ड के बेरोजगारों के लिए स्वरोजगार स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। कृषि में ऐसे पायलटों की मांग तेजी से बढ़ रही है। भविष्य में ड्रोन का इस्तेमाल भूमि एवं फसल सर्वे एवं मैंपिग के कार्यों में ड्रोन पायलटों की आवश्यता होगी। अतः इस केन्द्र का मुख्य उद्देश्य शिक्षित बेरोजगारों को देश की उन्नति के साथ जीवोपार्जन प्राप्त कराना है। उन्होंने इस केन्द्र की स्थापना में किये गये योगदान के लिए डा. अजित सिंह नैन, प्राध्यापक मौसम विज्ञान डा. अरविन्द कुमार त्यागी, प्राध्यापक मृदा विज्ञान, डा. अजय कुमार श्रीवास्तव, सहायक प्राध्यापक सस्य विज्ञान के प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर कुलपति ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित किए जा रहे ‘भारत रत्न नानाजी देशमुख निराश्रित गौवंश संवर्धन एवं अनुसंधान केंद्र’ को भी विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गौवंश की समस्या केवल पशु संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा, कृषि और सामाजिक व्यवस्था से भी जुड़ी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र में गौवंश के वैज्ञानिक प्रबंधन और संरक्षण पर काम किया जाएगा। केंद्र में निराश्रित गोवंश के लिए वैज्ञानिक आवास, संतुलित आहार प्रबंधन, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान और स्वास्थ्य प्रबंधन की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रत्येक पशु की टैगिंग और डिजिटल रिकॉर्डिंग भी की जाएगी, जिससे उसके स्वास्थ्य और प्रबंधन से जुड़ी जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज की जा सके। केंद्र के नामकरण को भारत रत्न नानाजी देशमुख के ग्रामीण विकास और गो-आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़े विचारों से जोड़ा गया है। केंद्र के माध्यम से गौवंश संरक्षण के साथ अनुसंधान, प्रशिक्षण और गौ-आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों के विकास पर भी काम किया जाएगा। इस हेतु विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, पशु उत्पाद प्रबंध विभाग डा. बृजेष सिंह को केन्द्र के निदेशक का दायित्व दिया गया है।
कुलपति ने बताया कि केंद्र की शुरुआत पहले चरण में 1000 गौवंश से किए जाने की योजना है, जिसे आगे बढ़ाकर लगभग 5000 गोवंश की क्षमता वाला केंद्र विकसित किया जाएगा। केंद्र के वैज्ञानिक स्वरूप में केवल गौवंश संरक्षण ही नहीं, बल्कि अनुसंधान, प्रशिक्षण और विस्तार गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। निराश्रित गौवंश की उत्पादकता और प्रबंधन संबंधी समस्याओं पर अनुसंधान, गौमूत्र एवं गोबर से जैविक खाद, जैवामृत, घनजीवामृत, वर्मी-कम्पोस्ट आदि के विकास तथा पंचगव्य आधारित उत्पादों पर काम किए जाने की योजना है। विश्वविद्यालय की ओर से किसानों, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को गौ-आधारित प्राकृतिक खेती, गौ-उत्पाद और पंचगव्य आधारित उद्यमों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।
पत्रकार वार्ता का संचालन निदेशक संचार, डा. जे.पी. जायसवाल द्वारा किया गया और इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक, विश्वविद्यालय फार्म, डा. आर.पी. सिंह, निदेशक शोध डा. एस.के. वर्मा, संयुक्त निदेशक श्रम कल्याण डा. बृजेश सिंह, प्राध्यापक, मौसम विज्ञान डा. ए.एस. नैन, डा. अरविन्द त्यागी, डा. अजय कुमार, सहायक निदेशक संचार डा. अर्पिता काण्डपाल के साथ प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।





