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घोड़े के वर्ष में दिव्य होगा कैलाश मानसरोवर सफर, यात्रियों को मिलेगा 12 यात्राओं का पुण्य

by Rajendra Joshi
July 6, 2026
in Dehardun, उत्तराखंड, खबर हटकर, ट्रेंडिंग खबरें, ताज़ा ख़बरें, न्यूज़, सोशल मीडिया वायरल
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कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए इस बार यात्रा काफी खास होने जा रही है. तिब्बती पंचांग के अनुसार दुर्लभ योग बन रहा है.-

देहरादून (उत्तराखंड):कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए इस बार यह धार्मिक यात्रा बेहद खास होने जा रही है. दरअसल इसकी वजह तिब्बती पंचांग में वो अश्व वर्ष है, जिसे एक दुर्लभ खगोलीय घटना के रूप में शुभ वर्ष माना गया है. खास बात यह है कि इस दौरान कैलाश मानसरोवर यात्रा के तिब्बत क्षेत्र में कई धार्मिक आयोजनों को भी किया जाता है, जिससे यात्री रूबरू हो पाएंगें.

कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए इस बार की यात्रा कई मायनों में बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह तिब्बती पंचांग में शुरू हुआ अश्व वर्ष है, जिसे अत्यंत शुभ और दुर्लभ आध्यात्मिक संयोग माना जाता है. मान्यता है कि इस वर्ष में कैलाश पर्वत की परिक्रमा और मानसरोवर के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को सामान्य वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है. खास बात यह भी है कि इस दौरान तिब्बत में कई विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं, जिनका अनुभव इस बार यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु भी कर सकेंगे.

कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील का महत्व केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है. बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए भी यह स्थल अत्यंत पवित्र और आस्था का केंद्र माना जाता है. यही कारण है कि हर वर्ष दुनिया के विभिन्न देशों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और कैलाश पर्वत की परिक्रमा तथा मानसरोवर झील के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं.

वैसे तो हर साल कैलाश मानसरोवर यात्रा अपने धार्मिक महत्व और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विशेष मानी जाती है, लेकिन इस बार तिब्बती पंचांग के अश्व वर्ष ने इसकी महत्ता को और बढ़ा दिया है. तिब्बती मान्यताओं के अनुसार यह वर्ष एक दुर्लभ खगोलीय और आध्यात्मिक संयोग का प्रतीक होता है, जो कैलाश यात्रा और पर्वत परिक्रमा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.

दरअसल तिब्बती पंचांग में समय का निर्धारण 12 पशुओं के चक्र के आधार पर किया जाता है. इसमें चूहा, बैल, बाघ, खरगोश, ड्रेगन, सांप, घोड़ा, बकरी, बंदर, मुर्गा, कुत्ता और सूअर शामिल हैं। इन सभी पशुओं का अपना अलग आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। इनमें सातवें स्थान पर आने वाला घोड़े का वर्ष विशेष रूप से ऊर्जा, शक्ति, स्वतंत्रता, गति और प्रगति का प्रतीक माना जाता है.

तिब्बती परंपरा के अनुसार प्रत्येक पशु वर्ष पांच तत्वों के साथ जुड़ा होता है. ये तत्व अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु और लकड़ी हैं. हर 60 वर्ष बाद किसी पशु और तत्व का वही संयोजन दोबारा आता है. इस बार घोड़े के साथ अग्नि तत्व का संयोग बना है, जिसे अग्नि अश्व वर्ष कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह संयोजन आध्यात्मिक उन्नति, सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है.

मान्यता यह भी है कि अश्व वर्ष के दौरान कैलाश पर्वत की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को 12 बार यात्रा करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. यही वजह है कि इस वर्ष को कैलाश यात्रियों के लिए विशेष अवसर के रूप में देखा जा रहा है. दुनिया भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के इस अवधि में यात्रा करने की संभावना जताई जा रही है. इतना ही नहीं अश्व वर्ष के पवित्र महीनों में तिब्बत क्षेत्र में कई विशेष धार्मिक अनुष्ठान, प्रार्थना सभाएं और आध्यात्मिक आयोजन भी आयोजित किए जाते हैं. इन्हें स्थानीय स्तर पर एक प्रकार के धार्मिक महोत्सव या महाकुंभ के रूप में देखा जाता है. इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को इन आयोजनों को करीब से देखने और उनका हिस्सा बनने का भी अवसर मिलेगा.

जाहिर है कि आस्था, आध्यात्मिकता और दुर्लभ धार्मिक संयोगों से जुड़ा यह वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हो सकता है. यही कारण है कि इस बार की यात्रा को केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि एक विशेष आध्यात्मिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिसका इंतजार वर्षों से श्रद्धालु करते रहे हैं.

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