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CM के रूप में धामी के 5 साल पूरे, 9 जुलाई को तोड़ देंगे ND तिवारी का रिकॉर्ड, जानिए पांच साल के धुरंधर फैसले!

by Rajendra Joshi
July 4, 2026
in उत्तराखंड
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आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है. रिपोर्ट- रोहित सोनी-

देहरादून:मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बतौर सीएम रहते हुए 5 साल का कार्यकाल आज 4 जुलाई 2026 को पूरा होने जा रहा है. खास बात यह है कि 9 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व सीएम दिवंगत एनडी तिवारी का रिकॉर्ड तोड़ प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन जाएंगे, जिनका मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल रहा है.

इन 5 सालों के दौरान जहां एक ओर राज्य सरकार ने तमाम बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं तो वहीं कई चुनौतियां भी सरकार के सामने आई हैं. इसी बीच नेतृत्व परिवर्तन की सुबुगाहट भी राजनीतिक गलियारों में देखने को मिली. हालांकि उनका ज्यादा असर सीएम धामी पर पड़ा नहीं है. इन सबके बीच कैसा रहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पांच साल का कार्यकाल और उनके किस फैसलों की चर्चा देश भर में हुई, जिससे उन्हें एक नेशनल लीडर के तौर पर भी पहचान मिली. इसी को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं.

बीजेपी के लिए आज का दिन बेहद खास:उत्तराखंड की भाजपा सरकार के लिए 4 जुलाई का दिन बेहद खास रहने है. क्योंकि, पुष्कर सिंह धामी भाजपा के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए, जिन्होंने बतौर मुख्यमंत्री 5 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है. हालांकि ये कार्यकाल दो टर्म का है. मुख्यमंत्री धामी के अलावा उत्तराखंड में अभी तक सिर्फ दिवंगत एनडी तिवारी ही ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं, जो उत्तराखंड में एक ही टर्म में पांच साल मुख्यमंत्री रहे हैं. हालांकि अब इस लिस्ट में अगला नाम मुख्यमंत्री धामी का जुड़ने जा रहा है.

4 जुलाई 2021 को बने थे सीएम:दरअसल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को 4 जुलाई 2021 को उत्तराखंड की कमान सौंपी गई थी, तभी से वो लगातार मुख्यमंत्री बने हुए हैं. ऐसे में पिछले विधानसभा के कार्यकाल के साथ ही वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल को मिलकर सीएम धामी का पांच साल का कार्यकाल चार जुलाई को पूरा हो रहा है. इसके साथ ही 9 जुलाई को पुष्कर सिंह धामी प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन जाएंगे, जिनका कार्यकाल सबसे लंबा रहा है. इसीलिए बीजेपी सीएम धामी के इस कार्यकाल को एक उत्सव के रुप में मना रही है.

धामी सरकार की उपलब्धियां:धामी सरकार के इन 5 सालों की मुख्य उपलब्धियों की बात करें तो इन 5 सालों में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों मेंयूसीसी (समान नागरिक संहिता), जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून संशोधन, भू-कानून, सख्त नकल विरोधी कानून, उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियमसमेत तमाम अन्य उपलब्धियां शामिल हैं.

इसके साथ ही धामी सरकार का दावा है कि उन्होंने10,000 एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करायाहै. यही नहीं सरकार की पांच साल की उपलब्धियों में200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाईकरना भी शामिल है.

2022 में बीजेपी को दिलाई थी बड़ी जीत:2022 का विधानसभा चुनाव सीएम पुष्कर सिंह धामी के ही चेहरे पर लड़ा गया था. इस चुनाव मेंबीजेपी को 47 सीटें मिली थी.हालांकि सीएम धामी खुद अपनी सीट खटीमा हार गए थे. इसके बाद भी बीजेपी हाईकमान का उन पर भरोसा कम नहीं हुआ और हराने के बावजूद बीजेपी हाईकमान में पुष्कर सिंह धामी को ही मुख्यमंत्री बनाया. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सीएम धामी ने चंपावत से उपचुनाव लड़ा और बड़े भारी मतों से उसे जीता भी.

जनवरी 2025 में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया:23 मार्च 2022को सरकार के गठन होने के साथ ही भाजपा सरकार ने जनता से किए गए वादों के अनुरूप प्रदेश में यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में आगे बढ़ी. दरअसल,सीएम धामी ने 2022 के विधानसभासे पहले ही घोषणा कर दी थी, वो सत्ता में आने के बादउत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागूकरेंगे, जिसे सीएम धामी ने पूरा भी किया.27 जनवरी 2025 को यूनिफॉर्म सिविल कोडको प्रदेश में लागू कर दिया गया.

विरोध के बावजूद पीछे नहीं हटे सीएम धामी:जब प्रदेश में यूसीसी लागू करने को लेकर कार्रवाई चल रही थी, उस दौरान राज्य सरकार को काफी अधिक विरोध का भी सामना करना पड़ा. क्योंकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों और सामाजिक संगठनों ने भी सीएम धामी के यूनिफार्म सिविल कोड का विरोध किया था. तमाम विरोध के बावजूद सीएम धामी अपने वादे पर अड़िग रहे और यूनिफार्म सिविल कोड उत्तराखंड में लागू करके दिखाया है. उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुए एक साल से ज्यादा का वक्त हो चुका हैं.

प्राकृतिक आपदाओं ने दी चुनौती: विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में प्रकृति जिनती राहत देती है, उतनी ही बेरहम भी है, जिसका उदाहरण हर साल मानसून सीजन के दौरान आपदाओं के रूप में देखने को मिलता है. उत्तराखंड राज्य में हर साल बड़ी आपदाएं आती हैं, जिससे जान माल को काफी नुकसान पहुंचता है. इस दौरान शासन प्रशासन से लेकर सरकार पर व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं, लेकिन जब भी उत्तराखंड किसी आपदा में फंसा तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद मोर्चा संभाला और ग्राउंड पर जाकर पूरे सिस्टम पर नजर रखी, जिसके अच्छे परिणाम भी सामने आए.

आपदाओं में खुद संभाला मोर्चा: पिछले पांच सालों के दौरान आई आपदाओं का जिक्र किया जाए तो, जिसमें धामी सरकार ने न सिर्फ बेहतर काम किया, बल्कि विपक्ष को भी निशाना साधने का मौका नहीं दिया। जोशीमठ भू-धसाव, सिल्क्यारा टनल हादसा, धराली आपदा और केदारनाथ आपदा समेत अन्य दैवीय आपदा में भी सीएम पुष्कर सिंह धामी के काम की तारीफ हुई.

उत्तराखंड में G20 का सफल आयोजन:सीएम धामी के बीते पांच सालों के कार्यालय में कुछ ऐसे आयोजन भी हुए है, जिनसे सीएम धामी पूरे देश की नजर में आए. दरअसल,26 से 28 जून 2023 को G20 की बैठक हुई.G20 की इन बैठकों का आयोजन ऋषिकेश, नरेंद्र नगर और रामनगर में हुआ था. इन बैठकों में कई देशों के प्रतिनिधि आए थे, जो उत्तराखंड की सभ्यता और संस्कृति से रूबरू हुए थे.

उत्तराखंड में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का आयोजन:इसके साथ हीदिसंबर 2023 में उत्तराखंड में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का आयोजनकिया गया. इस कार्यक्रम का उद्घाटन खुद पीएम मोदी ने किया था. इस इन्वेस्टर समिट के दौरानकरीब 3.57 लाख करोड़ रुपये के 1,779 एमओयू साइन हुएथे, जिसमें से अभी तक1.06 लाख करोड़ रुपये की ग्राउंडिंग हो चुकीहै.

38वें नेशनल गेम्स की मेजबानी:उत्तराखंड को38वें नेशनल गेम्स की मेजबानीमिली. इस आयोजन की न सिर्फ बाहरी राज्यों से आने वाले खिलाड़ियों ने तारीफ की, बल्किप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी सीएम धामीव उनकी टीम की पीठ थपथपा कर गए थे.

पेपर लीक केस में बड़ी कार्रवाई:उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक बड़ी समस्या बन गए थे. नकल माफिया सिस्टम पर हावी हो गया था. इससे युवाओं में निराशा और आक्रोश पैदा हो रहा था. ऐसे में धामी सरकार ने10 फरवरी 2023को देश का सबसेसख्त नकल विरोधी कानून (उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अध्यादेश, 2023)राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू कर दिया.

यह कानून राज्य में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए लाया गया. इस कानून के तहत नकल के दोषी को उम्रकैद और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है. उत्तराखंड की धामी सरकार का दावा है कि उहोंने पिछलेपांच साल में 31 हज़ार से अधिक सरकारी नौकरियां दीहैं. सरकार का लक्ष्य है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक ये संख्या 36 हज़ार से अधिक करने की है.

धर्मांतरण विरोधी कानून:उत्तराखंड में धर्मांतरण विरोधी कानून को और सख्त किया गया. दरअसल,अप्रैल 2018 में त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकारके दौरान धर्मांतरण विरोधी कानून पारित किया गया था.नवंबर 2022 में धामी सरकारके दौरान इसे अधिक सख्त बनाया, जिसके तहत जबरन धर्मांतरण कराने वाले कीअधिकतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दीगई. इसके बादसाल 2025 में इसेऔर सख्त बनाने के लिए तमाम अन्य प्रावधान भी इसके शामिल किए गए.

सशक्त भू कानून:उत्तराखंड की धामी सरकार ने मूल निवास और सशक्त भू कानून की मांग को लेकर हुए बड़े आंदोलनों का संज्ञान लेते हुए बड़ा कदम उठाया गया. उत्तराखंड के11 पहाड़ी जिलों में बाहरी लोगों द्वारा कृषि और बागवानी भूमि की खरीद पर रोक लगा दीगई है, जबकि हरिद्वार और उधमसिंह नगर जिले को इस दायरे से बाहर रखा गया. ऐसे में इन जिलों के नगर निकाय क्षेत्रों के बाहर केवल250 वर्ग मीटर भूमि ही खरीदी जा सकेगी. यदि किसी ने अवैध तरीके से जमीन खरीदी भी है तो वो सरकार में निहित कर दी जाएगी.

महिलाओं के 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया:उत्तराखंड की इकोनॉमी को मनीऑर्डर इकोनॉमी कहा जाता है, ठीक उसी तरह उत्तराखंड में कामकाज का भार महिला शक्ति पर रहता है. पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने पिछले चार साल में महिला सशक्तिकरण के लिएसरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण लागूकिया है. इसके साथ ही ‘लखपति दीदी’ योजना लागू की गई है. ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ भी महिलाओं के लिए गेम चेंजर साबित हो रही हैं. इसके साथ ही महिलाओं कोसहकारी समितियों में 33% आरक्षण दिया जा रहा है.

मदरसा बोर्ड को समाप्त किया:धामी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त किया.मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियमको तैयार किया जो1 जुलाई 2026से प्रदेश में लागू हो गया है. इस अधिनियम की खास बात यह है कि इसके तहत प्रदेश में संचालित सभी मदरसों को न सिर्फ उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेनी होगी, बल्कि इस अधिनियम के तहत गठित अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से भी मान्यता लेकर उनके बनाए हुए धार्मिक सिलेबस को ही अपने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ना होगा. इस अधिनियम के लागू होने के साथ ही प्रदेश में भी मुस्लिम संगठन ने विरोध शुरू कर दिए हैं.

इन बातों से चर्चाओं में आए:इसके अलावा सीएम धामी नेलैंड जिहाद और थूक जिहादजैसे शब्दों से नेशनल मीडिया में छाए. सीएम धामी ने सरकारी जमीनों पर हो रखे अतिक्रमण को न साफ किया है. बल्कि उसके खिलाफ एक बड़े स्तर पर अभियान भी चलाया.

सीएम पुष्कर सिंह धामी की इन तमाम उपलब्धियों पर बीजेपी संगठन और सरकारचार जुलाई से दस जुलाईके बीच कई बड़े कार्यक्रम करने जा रही है. अपनी इन उपब्लधियों के बारे में सीएम पुष्कर सिंह धामी का क्या कहना है, वो भी आप जानिए.

मेरे से पहले प्रदेश में जितने भी मुख्यमंत्री रहे हैं, वो सभी बहुत अनुभवी थे. मैं सभी पूर्व मुख्यमंत्री अनुभव और उम्र में मेरे से बड़े थे, जिनसे मुझे बहुत कुछ सीख मिली हैं. यहां पर कोई ऐसी कंपटीशन की बात नहीं है, क्योंकि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से कुछ ना कुछ सीखने को मिला है.

कुछ लोग इस बात को कह रहे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वं एनडी तिवारी का रिकॉर्ड वह तोड़ने जा रहे हैं, लेकिन मैंने पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी से बहुत कुछ सीखा है. एनडी तिवारी जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने थे तो उनके पास उनके पूरे जीवन का अनुभव था, लेकिन जब मैं मुख्यमंत्री बने तब नवोदित था. लिहाजा कंपटीशन जैसी कोई बात नहीं है.
-पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड सीएम-

प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी से लेकर जितने भी मुख्यमंत्री बने हैं, उन सभी का सीएम धामी ने धन्यवाद किया हैं. क्योंकि उन सभी से कुछ ना कुछ उन्हें सीखने को मिला है, और राज्य को आगे बढ़ाने में इन सभी लोगों ने बेहतर काम किया है.

बीजेपी नेता किस तरह देखते हैं सीएम धामी के कार्यकाल को:भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कहा कि सीएम धामी हर दृष्टि से पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के रिकॉर्ड को तोड़ रहे हैं. इसके साथ ही प्रदेश भर में जो काम हो रहे हैं, उसके लिए सरकार ने बहुत महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए है, जिसमें यूनिफॉर्म सिविल कोड शामिल है, जो बहुत मुश्किल था.

उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला ऐसा राज्य बना. लिहाजा धामी सरकार का ये निर्णय इतिहास बन चुका है. इसके अलावा धर्मांतरण कानून इतिहास बना चुका है. लैंड जिहाद के खिलाफ कार्रवाई एक रिकॉर्ड बन चुकी है. ऐसे में इन पांच सालों के दौरान वो तमाम निर्णय हुए हैं, जो कांग्रेस सरकार के दौरान नहीं हुए.
-विनोद चमोली, भाजपा विधायक-

कांग्रेस ने निकाली कमियां:एक तरफ जहां बीजेपी सरकार और संगठन सीएम धामी की उपलब्धियां गिनाने में लगा हुआ है तो वहीं कांग्रेस कमियां तलाशने में. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट ने कहा कि

भाजपा इस बात को कह रही है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री स्वं एनडी तिवारी का रिकॉर्ड तोड़ेंगे, लेकिन कौन सा रिकॉर्ड सीएम धामी तोड़ने जा रहे हैं वो बड़ी बात है. क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने एक ही सरकार में एक ही कार्यकाल में 5 साल मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाए थे, लेकिन सीएम धामी भाजपा के दो सरकारों में 5 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं. ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री का रिकॉर्ड तोड़ने में काफी अधिक समय बचा हुआ है, लेकिन भाजपा इस बात को लेकर खुश हो सकती है कि दो सरकारों में ही सही लेकिन उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री का रिकॉर्ड तोड़ने वाले है. पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने जो विकास के रिकॉर्ड बनाए हैं, उसके आसपास भी सीएम धामी नहीं है.
-शीशपाल बिष्ट, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस-

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