पंतनगर। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय स्तरीय सांस्कृतिक समिति ‘सांस्कृतिक चेतना परिषद’ द्वारा भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत–2083 के पावन अवसर पर गांधी हॉल में ‘नवारंभ 2083’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, परंपरा एवं मूल्यों का सजीव एवं आकर्षक प्रस्तुतीकरण देखने को मिला।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ऊधम सिंह नगर के जिला न्यायाधीश सिकंद कुमार त्यागी रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रथम महिला वीना चौहान एवं माननीय जिला न्यायाधीश की धर्मपत्नी ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ तथा परिषद की परामर्शदात्री डा. विनीता राठौर द्वारा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ की मंगलकामनाओं के साथ सकारात्मक वातावरण का सृजन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि तथा कुलपति द्वारा परिषद की वार्षिक पत्रिका ‘संस्कृति’ के पंचम संस्करण का विमोचन किया गया। सिकंद कुमार त्यागी ने अपने उद्बोधन में ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की उत्पत्ति की पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए भारतीय नववर्ष के महत्व को स्पष्ट किया तथा विश्वविद्यालय द्वारा कृषि एवं शोध के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस वर्ष कार्यक्रम की मुख्य थीम ‘पंचसूत्र’ रही, जो भारतीय संस्कृति में ‘पांच’ अंक के विशेष महत्व को दर्शाती है। कविताओं एवं नृत्य के माध्यम से बच्चों ने भारतीय संस्कृति की गहराई और व्यापकता को सहजता से व्यक्त किया, जिसने दर्शकों को अत्यंत प्रभावित किया और भरपूर सराहना प्राप्त की।
कार्यक्रम का आयोजन छात्र कल्याण अधिष्ठाता डा. आनंद सिंह जीना के मार्गदर्शन तथा सहायक छात्र कल्याण अधिष्ठाता डा. राजीव रंजन के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। परिषद की परामर्शदात्री डा. विनीता राठौर के निर्देशन में पूरे कार्यक्रम का संचालन अत्यंत सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली रहा।
कार्यक्रम में संचार निदेशक डा. जे.पी. जायसवाल, निदेशक उत्तराखण्ड जैव प्रौद्योगिकी परिषद हल्दी डा. संजय शर्मा, निदेशक सेवायोजन परामर्श निदेशालय डा. एम.एस. नेगी, तथा विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता डा. सुभाष चंद्र, डा. अल्का गोयल, डा. एस.एस. गुप्ता सहित विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों के स्टाफ काउंसलर, छात्रावास अभिरक्षक, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
समग्र रूप से ‘नवारंभ 2083’ कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, परंपराओं एवं मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा, जिसने सभी उपस्थित जनों को अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने का प्रेरणादायी संदेश दिया।







