पंतनगर, 21 फरवरी 2026। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कृषि संचार विभाग, कृषि महाविद्यालय द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से वित्तपोषित जनजातीय उप योजना के अंतर्गत 20-21 फरवरी 2026 को “मिलेट्स, सब्जी उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से जनजातीय महिलाओं का सशक्तिकरण” विषय पर दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में विकासखण्ड खटीमा के ग्राम नवगाँवठग्गू की अनुसूचित जनजाति की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को मिलेट्स एवं सब्जी उत्पादन की उन्नत तकनीकों, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन संबंधी ज्ञान प्रदान कर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निदेशक, प्रसार शिक्षा डा. जितेन्द्र क्वात्रा रहे। इस अवसर पर निदेशक, संचार डा. जे. पी. जायसवाल, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. ए.एस. जीना, समेटी के प्रभारी डा. बी.डी. सिंह, प्रोफेसर डा. निर्मला भट्ट, डा. ललित भट्ट तथा वी.आर.सी. के निदेशक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वयन जनजातीय उप योजना की प्रधान अन्वेषक डा. अर्पिता शर्मा कंडपाल द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि डा. जितेन्द्र क्वात्रा ने कहा कि मिलेट्स एवं सब्जी आधारित मूल्य संवर्धन गतिविधियाँ जनजातीय महिलाओं के लिए आय वृद्धि का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग पर बल देते हुए कहा कि महिलाएँ लघु उद्यम स्थापित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल ने ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं प्रभावी विपणन रणनीतियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. ए.एस. जीना ने मिलेट्स एवं सब्जियों को पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इनके प्रसंस्करण से आय एवं स्वास्थ्य दोनों में सुधार की बात कही। समेटी के प्रभारी डा. बी.डी. सिंह ने उन्नत उत्पादन तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर डा.निर्मला भट्ट ने समूह आधारित उद्यम स्थापना को महिलाओं की सामूहिक शक्ति का आधार बताया। डा. ललित भट्ट ने कम लागत वाली मूल्य संवर्धन तकनीकों को अपनाकर घरेलू स्तर पर लाभकारी उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी। प्रधान अन्वेषक डा. अर्पिता शर्मा कंडपाल ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं के ज्ञान, कौशल एवं आत्मविश्वास में वृद्धि करना है, ताकि वे सतत आजीविका की दिशा में अग्रसर हो सकें। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा मिलेट्स आधारित उत्पाद निर्माण, उन्नत सब्जी उत्पादन तकनीक, फसलोत्तर प्रबंधन, भंडारण एवं विपणन की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
समापन सत्र में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताया और स्वरोजगार के नए अवसरों की जानकारी मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। जनजातीय उप योजना के अंतर्गत प्रतिभागियों को प्रशिक्षण सामग्री एवं आवश्यक कृषि आदान भी वितरित किए गए। यह कार्यक्रम जनजातीय महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण एवं सतत आजीविका संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2024








