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66वीं शोध सलाहकार समिति की बैठक सम्पन्न

by Rajendra Joshi
January 28, 2026
in उधम सिंह नगर
0
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  • वैज्ञानिक गुणवत्तायुक्त एवं आमजन की वास्तविक समस्याओं के दृष्टिगत शोध कार्य करें – कुलपति

पंतनगर। 28 जनवरी 2026। विश्वविद्यालय के शोध निदेशालय द्वारा 66वीं शोध सलाहकार समिति की दो-दिवसीय बैठक प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में विश्वविद्यालय के कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित की गयी। बैठक का उद्देश्य वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न परियोजनाओं में किए जा रहे शोध कार्यों की समीक्षा करना एवं उत्तराखंड में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लाभ के लिए भविष्य की योजना विकसित करना था। दो-दिवसीय बैठक में कुल 9 सत्रों में 59 शोध परियोजनाओं का कार्य विवरण संबंधित परियोजना अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा आगामी वर्षों के शोध कार्यों हेतु सुझाव साझा किए गए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के 150 से अधिक परियोजना समन्वयकों/परियोजना अधिकारियों द्वारा पिछले एक वर्ष में किए गए शोध की प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर शोध सलाहकार समिति के सदस्यों के रूप में डा. त्रिवेणी दत्त निदेशक एवं कुलपति भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली; डा. धीर सिंह निदेशक एवं कुलपति राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल; डा. एम. मधु निदेशक भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून; डा. लक्ष्मीकांत निदेषक विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा; डा. अरविंद बिजलवान अधिष्ठाता, भरसार, विष्वविद्यालय; डा. वाई.पी.एस. मलिक, संयुक्त निदेशक, आई.वी.आर.आई. मुक्तेश्वर एवं डा. प्रेम कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, मत्स्य अनुभाग, आई.सी.ए.आर., नई दिल्ली उपस्थित थे जिन्होंने विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत शोध कार्यक्रमों की समीक्षा की और सुझाव दिए।


प्रस्तुतिकरण में डा. धीर सिंह द्वारा यह सुझाव दिया गया कि विश्वविद्यालय को कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में शोध के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का प्रयास करना चाहिए। डा. त्रिवेणी दत्त द्वारा विकसित भारत 2047 के लिए नेक्स्ट जनरेशन एग्रीकल्चर पर जोर दिया गया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि षोध कार्य बाजार की मांग से संबंधित होना चाहिए। डा. एम मधु ने कम बजट में अच्छा शोध करने तथा साथ ही सभी विभागों के उपलब्धियों का वार्षिक विवरण तैयार करने और विभाग स्तर पर समीक्षा का सुझाव दिया। डा. लक्ष्मीकान्त ने शोध की गुणवत्ता में वृद्धि के लिए बहुमूल्य सुझावों के साथ अगले 5 वर्ष की योजना बनाकर शोध कार्य किए जाने का सुझाव दिया। डा. अरविंद बिजलवान, अधिष्ठाता भरसार द्वारा उच्च गुणवत्ता युक्त शोध पत्रों के प्रकाशन तथा इकोसिस्टम सर्विस आधारित कार्य किए जाने पर विशेष बल दिया गया।
कुलपति डा. मनमोहन सिंह ने वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों को प्रसार केन्द्रों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने हेतु जोर दिया गया। उन्होंने यह भी जोर दिया कि पर्वतीय कृषि एवं कृषकों की समस्याओं के निराकरण हेतु शोध कार्य किए जाएं। कार्यक्रम के प्रारम्भ में निदेशक शोध, डा. एस.के. वर्मा द्वारा विगत एक वर्ष के शोध कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए आगामी एक वर्श का रोडमैप प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, निदेशक, नियंत्रक, मुख्य कार्मिक अधिकारी, कुलसचिव सहित सभी अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया तथा कार्यक्रम के समापन अवसर पर संयुक्त निदेशक शोध डा. पी.के. सिंह एवं डा. मंजुल कांडपाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्ततु किया गया।

Tags: GB Pant University

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