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एक छत के नीचे सुकून, भरोसा और नई ज़िंदगी : नारी निकेतन की बदली तस्वीर

by Rajendra Joshi
January 21, 2026
in देहरादून
0
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देहरादून 21 जनवरी,2026 (सू.वि) | देहरादून के केदारपुरम क्षेत्र में स्थित राजकीय नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन बाहर से भले ही एक साधारण परिसर प्रतीत होता हो, लेकिन इसके भीतर कदम रखते ही यह एहसास गहराने लगता है कि यह स्थान केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि टूटे विश्वासों को संजोने, बिखरी ज़िंदगियों को सहारा देने और नई शुरुआत का साहस जगाने की एक जीवंत कोशिश है।

यहाँ हर चेहरा एक कहानी कहता है-किसी की आँखों में छूटा हुआ बचपन है, किसी की खामोशी में पीड़ा की टीस, तो किसी की मुस्कान में नए जीवन की उम्मीद। यह वह सुरक्षित आश्रय है, जहाँ परित्यक्त और बेसहारा महिलाओं तथा अनाथ बच्चों को सिर्फ छत नहीं मिलती, बल्कि अपनापन, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीने का हक़ मिलता है। नारी निकेतन की हर सुबह यह भरोसा लेकर आती है कि अंधेरे के बाद रोशनी अवश्य आती है और हर जीवन दोबारा संवर सकता है।

दर्द से विश्वास तक का सफ़र-नारी निकेतन में संवरती ज़िंदगियाँ

माननीय मुख्यमंत्री की प्रेरणा और देहरादून जिला प्रशासन के संकल्प से इस परिसर को एक ऐसा संवेदनशील और सुरक्षित स्थान बनाया गया है, जहाँ महिलाएँ और बच्चे केवल शरण नहीं पाते, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हैं। यहाँ सुबह केवल घंटी की आवाज़ से नहीं, बल्कि इस विश्वास से होती है कि आज भी कोई उनकी चिंता कर रहा है। बालिकाओं और शिशुओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित पोषण, समय पर उपचार, स्वच्छ वातावरण और स्नेहिल देखभाल-ये सभी व्यवस्थाएँ उन अदृश्य घावों पर मरहम का काम कर रही हैं, जिन्हें शब्दों में बयां करना कठिन है।

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जिलाधिकारी सविन बंसल के सतत प्रयासों से बुजुर्ग महिलाओं के लिए 30 बेड का अतिरिक्त भवन लगभग तैयार हो चुका है। यह भवन केवल एक संरचना नहीं, बल्कि उन महिलाओं के लिए सुकून और सम्मान का ठिकाना है, जो जीवन के अंतिम पड़ाव पर अकेली रह गईं। निकेतन की व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है, ताकि कोई भी महिला या बच्चा स्वयं को असुरक्षित या अनदेखा महसूस न करे-क्योंकि यहाँ हर जीवन की कीमत है।

जब प्रशासन बना परिवार-नारी निकेतन में लौटी मुस्कानें

जिलाधिकारी के नेतृत्व में जिला योजना एवं खनिज न्यास से बजट की व्यवस्था कर निकेतन में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया गया है। सीवर लाइन, डोरमेट्री, आवास, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया गया है। वर्तमान में केदारपुरम स्थित नारी निकेतन में 178 बेसहारा, परित्यक्त एवं शोषित महिलाएँ निवासरत हैं। बालिका निकेतन में 21 बालिकाएँ तथा बाल गृह एवं शिशु सदन में 23 बच्चे रह रहे हैं, जिन्हें सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, आश्रय और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है।

पेंटिंग, स्लोगन से बोलती दीवारें, सुशोभित पुष्प वाटिका दे रही जीवन की प्रेरणा

बालक एवं बालिका निकेतन में बच्चों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ कम्प्यूटर शिक्षा दी जा रही है। वहीं नारी निकेतन की महिलाओं को क्राफ्ट डिज़ाइन, ऊनी वस्त्रों की कढ़ाई-बुनाई, सिलाई जैसे आजीविकापरक प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। इसके साथ ही संगीत, वाद्य यंत्र एवं योग प्रशिक्षण के माध्यम से उनके मानसिक और शारीरिक सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बालिका निकेतन में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास हेतु एक समुचित खेल मैदान का निर्माण कराया जा रहा है, जहाँ वे खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन एवं योग जैसी गतिविधियों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और सशक्त करने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर दो अतिरिक्त होमगार्ड, दो अतिरिक्त नर्सों की तैनाती तथा डॉक्टरों की नियमित विजिट सुनिश्चित की गई है।

सिर्फ आश्रय नहीं, संरक्षित जीवन-डीएम की नियमित मॉनिटरिंग से नारी निकेतन में उत्सव का माहौल

नारी निकेतन, बालिका निकेतन एवं शिशु सदन में शौचालय-स्नानागार, डायनिंग एरिया, मंदिर परिसर की ग्रिलिंग, जिम एवं प्रयोगात्मक क्षेत्र का समतलीकरण, छत मरम्मत, अलमीरा, लॉन्ड्री रूम, रसोई एवं भवन अनुरक्षण, इन्वर्टर स्थापना सहित अनेक विकास एवं सुदृढ़ीकरण कार्य कराए गए हैं। बच्चों के लिए पर्याप्त रजाइयाँ, बेड एवं डबल गद्दों की व्यवस्था की गई है, ताकि वे सुरक्षित और आरामदायक वातावरण में रह सकें।

डीएम की पहल से बुजुर्ग महिलाओं को सम्मानजनक आश्रय, 30 बेड का दो मंजिला भवन रिकॉर्ड 01 वर्ष में पूर्णता की ओर

गत दिसंबर माह में जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान उन्होंने इन संस्थानों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए आश्वस्त किया था कि नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन की सभी आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। आज उनके इस संकल्प का परिणाम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता के चलते योजनाएँ काग़ज़ से उतरकर ज़िंदगियाँ बदल रही हैं। समाज के सबसे कमजोर वर्ग को जब सम्मान और सहारा मिलता है, तभी विकास का अर्थ पूर्ण होता है। केदारपुरम का यह निकेतन केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि उम्मीद की कहानी है-नई शुरुआत की कहानी और इंसानियत के जीवित रहने की कहानी।

Tags: Dehradun newsDM dehradun

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