पंतनगर, 12 फरवरी 2026। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा संचालित ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन फ्रूट्स की 13वीं समूह चर्चा का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया।
राष्ट्रीय आयोजन सचिव एवं परियोजना समन्वयक (फल) डा. प्रकाश पाटिल ने कार्यक्रम के सुव्यवस्थित एवं सफल आयोजन के लिए आयोजन सचिव डा. ए.के. सिंह तथा उनकी टीम को हार्दिक बधाई दी। इस अवसर पर विभिन्न केंद्रों के प्रदर्शन की समीक्षा के बाद पुरस्कारों की घोषणा की गई। प्रथम पुरस्कार नवसारी कृषि विश्वविद्यालय, गंदेवी को और द्वितीय पुरस्कार महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी को प्रदान किया गया। वहीं, बेस्ट एक्सपेरिमेंटल ईंचार्ज अवार्ड से कीट विज्ञान विभाग की डा. पूनम श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में अधिष्ठाता, कृषि डा. सुभाष चंद्र ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए गुणवत्तापूर्ण पौध रोपण सामग्री के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता की पौध सामग्री ही फलों की उत्पादन क्षमता को स्थायी रूप से बढ़ा सकती है। निदेशक शोध डा. एस.के. वर्मा ने एआईसीआरपी की उपयोगिता और समन्वित अनुसंधान के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने फल उत्पादन बढ़ाने के लिए और अधिक समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधान वैज्ञानिक, आईआईएचआर, बेंगलुरु के डा. पी.सी. त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय द्वारा किए गए उत्कृष्ट आयोजन की सराहना की और एआईसीआरपी के अंतर्गत हो रही प्रगति को सकारात्मक बताया। उन्होंने केंद्र प्रभारी वैज्ञानिकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए क्षेत्र-विशिष्ट समस्याओं के समाधान पर जोर दिया। राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र, केला के डा. सेल्वा रंजन ने बताया कि केला वैश्विक स्तर पर निर्यात की जाने वाली प्रमुख फसल है, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जन की अपार संभावनाएं हैं। एक रोग विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने डा. वाई.एल. नेने के योगदान को भी स्मरण किया। संयुक्त महानिदेशक (फल एवं बागवानी फसलें) डा. वी.बी. पाटिल ने पुरस्कार प्राप्त केंद्रों को बधाई देते हुए फल अनुसंधान में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने क्लीन प्लांट सेंटर की भूमिका को रेखांकित करते हुए ड्रैगन फ्रूट जैसी नवीन फसलों पर अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी वैज्ञानिकों एवं संस्थानों के योगदान की सराहना की गई। धन्यवाद ज्ञापन डा. प्रकाश पाटिल द्वारा प्रस्तुत किया गया।








